एशियाई बाज़ारों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। जापान का Nikkei 225 इंडेक्स **3.9%** लुढ़क गया, क्योंकि निवेशकों ने AI स्टॉक्स के मूल्यांकन को लेकर चिंता जताई है। सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारी नुकसान देखा जा रहा है, जबकि तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक निवेशकों के लिए अनिश्चितता पैदा कर रही हैं।
AI चिप स्टॉक्स पर दबाव
शुक्रवार को एशियाई शेयर बाज़ारों में बड़ी गिरावट आई, क्योंकि निवेशकों ने टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियों से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। MSCI Asia Pacific Index 0.8% गिर गया, जिसका मुख्य कारण जापान के Nikkei 225 इंडेक्स में 3.9% की बड़ी गिरावट रही। यह लगातार दूसरा सत्र है जब क्षेत्र में गिरावट देखी गई है। यह बिकवाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में मौजूदा मूल्यांकन की स्थिरता को लेकर निवेशकों की बढ़ती घबराहट को दर्शाती है।
सेमीकंडक्टर सेक्टर पर बड़ा असर
एशियाई बाज़ारों में चिप निर्माता और टेक से जुड़ी कंपनियों पर भारी दबाव देखा गया। Kioxia Holdings Corp. के शेयरों में 16% की बड़ी गिरावट आई, जिससे हाल के शिखर से 50% से अधिक का नुकसान हुआ। एशियाई सेमीकंडक्टर फर्मों को ट्रैक करने वाला इंडेक्स अब मार्च की शुरुआत के बाद अपने सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है। यह दर्शाता है कि मौजूदा बाज़ार की अस्थिरता मुख्य रूप से टेक इंडस्ट्री के हार्डवेयर सेगमेंट पर केंद्रित है।
AI मूल्यांकन और कैपिटल खर्च पर सवाल
बाज़ार में अशांति का मुख्य कारण यह बहस है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारी, रिकॉर्ड-स्तरीय निवेश अंततः स्थायी लाभ में बदलेगा। प्रमुख अमेरिकी टेक्नोलॉजी फर्में इस साल AI से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर पर $725 बिलियन से अधिक खर्च करने की उम्मीद कर रही हैं। भले ही ये कंपनियां इस खर्च को दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक बताती हों, लेकिन निवेशक लगातार इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या ये उच्च लागत भविष्य के मुनाफे को प्रभावित करेंगी। इस अनिश्चितता ने Taiwan Semiconductor Manufacturing Co. (TSMC) जैसी कंपनियों के मजबूत नतीजों पर भी दबाव बना दिया है, जिनके शेयर मजबूत मांग के संकेतों के बावजूद दबाव में आ गए हैं।
ऊर्जा लागत का असर
टेक सेक्टर के बाहर की घटनाओं ने भी निवेशकों की घबराहट को और बढ़ा दिया है। तेल की कीमतों में बड़ी रिकवरी देखी गई है, ब्रेंट क्रूड लगभग 12% की साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा है। यह उछाल मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित शिपिंग व्यवधानों की चिंताओं से प्रेरित है। तेल की कीमतों में यह नई वृद्धि लगातार मुद्रास्फीति (Inflation) के डर को बढ़ा रही है, जो ब्याज दर नीतियों को जटिल बना सकती है और उपभोक्ता खर्च को कम कर सकती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
बाज़ार का ध्यान अब प्रमुख टेक्नोलॉजी फर्मों की आगामी अर्निंग रिपोर्ट्स और मैनेजमेंट की टिप्पणियों पर केंद्रित है, ताकि यह देखा जा सके कि क्या वे मौजूदा बड़े कैपिटल खर्च योजनाओं को सही ठहरा सकते हैं। निवेशक तेल बाज़ार की अस्थिरता पर भी नज़र रख रहे हैं, क्योंकि लगातार उच्च ऊर्जा कीमतें व्यापक आर्थिक बाधा बन सकती हैं। अगली महत्वपूर्ण अपडेट संभवतः इस बात पर केंद्रित होगी कि क्या टेक फर्में अपने विस्तार बजट को बनाए रखती हैं या बाज़ार के ठंडे पड़ते सेंटिमेंट के जवाब में अपने दृष्टिकोण को समायोजित करती हैं।
