एशियाई बाजार AI की उम्मीदों पर चमके, कच्चा तेल 96 डॉलर के पार

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
एशियाई बाजार AI की उम्मीदों पर चमके, कच्चा तेल 96 डॉलर के पार

गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में तेजी देखी गई, खासकर AI से जुड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में। वहीं, ब्रेंट क्रूड ऑयल 96 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई की चिंताएं बढ़ गई हैं, जो वैश्विक केंद्रीय बैंकों के लिए मौद्रिक नीति को और जटिल बना सकती हैं।

Detailed Coverage

गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में मजबूती दिखी, जिसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में आई रिकवरी रही। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद यह तेजी बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 96.14 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गईं, जो जून की शुरुआत के बाद का उच्चतम स्तर है। निवेशक फिलहाल महंगी ऊर्जा की वजह से पैदा होने वाले मैक्रोइकॉनॉमिक जोखिमों के मुकाबले टेक-केंद्रित कंपनियों की ग्रोथ की संभावनाओं का आकलन कर रहे हैं।

क्षेत्रीय रैली का नेतृत्व दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) इंडेक्स ने किया, जो 3.7% बढ़कर 7,028.66 पर पहुंच गया। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हाइनिक्स (SK Hynix) जैसी प्रमुख टेक्नोलॉजी फर्मों में शानदार बढ़त ने इसे बढ़ावा दिया। जापान में, सॉफ्टबैंक ग्रुप (SoftBank Group) के शेयरों में 3.3% की बढ़ोतरी के सहारे निक्केई 225 (Nikkei 225) 0.5% बढ़कर 66,461.62 पर चढ़ गया। वहीं, हांगकांग का हैंग सेंग (Hang Seng) इंडेक्स 1.3% बढ़कर 25,227.06 पर पहुंच गया।

हालांकि, सभी बाजारों का प्रदर्शन ऐसा सकारात्मक नहीं रहा। भारत का सेंसेक्स (Sensex) मामूली 0.3% की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट (Shanghai Composite) 0.2% गिरकर 3,859.69 पर आ गया। ताइवान का ताइपेक्स (Taiex) 1% की बड़ी गिरावट के साथ और भी मुश्किल में दिखा। अमेरिका में, बाजार का सेंटिमेंट सतर्क बना हुआ है; अल्फाबेट (Alphabet) जैसी कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर नतीजे घोषित किए, लेकिन AI डेवलपमेंट के लिए भारी पूंजीगत खर्च पर निवेशकों की कड़ी नजर के कारण शेयर दबाव में थे। इसी तरह, टेस्ला (Tesla) भी बढ़ती रिसर्च और डेवलपमेंट लागत के कारण दबाव में रही, जिसने उसके हालिया प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाला।

ऊर्जा क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के लिए एक प्रमुख फोकस बना हुआ है। तेल की कीमतों में यह उछाल काफी हद तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में व्यवधानों से जुड़ा है, जो ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। तेल की ऊंची कीमतें व्यापक अर्थव्यवस्था पर एक छिपे हुए टैक्स की तरह काम कर सकती हैं, जिससे व्यवसायों की परिचालन लागत बढ़ जाती है और उपभोक्ताओं के लिए डिस्पोजेबल आय कम हो सकती है। यह केंद्रीय बैंकों के लिए एक कठिन माहौल बनाता है, क्योंकि लगातार ऊर्जा-संचालित महंगाई ब्याज दरों में कटौती करने की उनकी क्षमता को सीमित कर सकती है। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी नोट की यील्ड 4.65% तक बढ़ गई, जो बाजार की इस उम्मीद को दर्शाता है कि मुद्रास्फीति के दबाव से निपटने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की आवश्यकता हो सकती है।

निवेशकों के लिए, आने वाले हफ्तों में मुख्य निगरानी यह होगी कि लगातार ऊर्जा लागत का अगली तिमाही के नतीजों में कॉर्पोरेट लाभप्रदता पर कैसे असर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, AI-लिंक्ड शेयरों में अस्थिरता को ट्रैक करना यह निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा कि वर्तमान रिकवरी लंबी अवधि की कमाई क्षमता पर आधारित है या अल्पकालिक गति पर, खासकर जब कंपनियां नई तकनीक में आक्रामक विस्तार को स्वस्थ लाभ मार्जिन बनाए रखने की आवश्यकता के साथ संतुलित करना जारी रखती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.