एशियाई शेयर बाज़ारों में शुक्रवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। अमेरिका के ताज़ा लेबर डेटा से अर्थव्यवस्था के ठंडा पड़ने के संकेत मिले हैं, जिससे फेडरल रिज़र्व द्वारा तुरंत ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गई हैं। निवेशक अब सेंट्रल बैंक के नीतिगत रास्ते का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं, जिसका असर क्षेत्रीय बेंचमार्क और करेंसी बाज़ारों पर पड़ा है।
क्या हुआ?
जून के लिए धीमी पेरोल ग्रोथ दिखाने वाली एक प्रमुख अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट के बाद शुक्रवार को एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला प्रदर्शन देखा गया। पिछले महीनों के रोज़गार आंकड़ों में हुई गिरावट को भी इस डेटा में शामिल किया गया था, जिससे ट्रेडर्स की फेडरल रिज़र्व द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गई हैं। नतीजतन, CME ग्रुप के FedWatch टूल के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल बैंक के सितंबर की बैठक के दौरान ब्याज दरों को स्थिर रखने की संभावना बढ़कर 46.8% हो गई है, जो पहले 35.8% थी।
क्षेत्रीय बाज़ारों पर असर
क्षेत्रीय प्रदर्शन में भिन्नता थी, जापान के बाहर MSCI एशिया-पसिफ़िक शेयरों के इंडेक्स में 0.1% का मामूली लाभ दर्ज किया गया। अमेरिकी टेक्नोलॉजी और चिपमेकिंग शेयरों में गिरावट के बाद दक्षिण कोरियाई कोस्पी इंडेक्स में हुई बिकवाली से सेंटीमेंट पर दबाव पड़ा। वहीं, जापान का निक्केई 225 1% गिर गया, जो स्थानीय बाज़ार समायोजन को दर्शाता है। हालांकि, अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी के कारण ट्रेडिंग वॉल्यूम कम रहने की उम्मीद है, अमेरिकी S&P 500 और Nasdaq के लिए स्टॉक फ्यूचर्स में 0.1% की मामूली बढ़त दिखी।
करेंसी और कमोडिटी पर प्रतिक्रिया
अमेरिकी डॉलर में स्थिरीकरण के संकेत दिखे, जिससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 100.98 के करीब बना रहा। जापानी येन के मुकाबले, डॉलर 0.2% बढ़कर 161.435 हो गया। जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित हस्तक्षेप की रणनीतियों के प्रति करेंसी बाज़ार विशेष रूप से संवेदनशील बने हुए हैं। कमोडिटीज़ की बात करें तो, वैश्विक आर्थिक संकेतों में बदलाव पर ट्रेडर्स की प्रतिक्रिया के चलते ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर $71.49 प्रति बैरल पर आ गया। सोने की कीमतों में मामूली वृद्धि देखी गई, जो $4,125.49 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि बिटकॉइन और ईथर जैसी डिजिटल संपत्तियों में मामूली गिरावट आई।
लेबर मार्केट की कहानी
मई में 4.3% से अमेरिकी बेरोज़गारी दर घटकर 4.2% हो गई, लेकिन विश्लेषकों ने नोट किया कि यह मज़बूत रोज़गार सृजन के बजाय घटते लेबर फ़ोर्स के कारण हुआ। पांच साल के निचले स्तर पर पहुंचा पार्टिसिपेशन रेट एक महत्वपूर्ण मीट्रिक है जो बताता है कि श्रमिक बाज़ार से बाहर निकल रहे हैं, जो अर्थव्यवस्था के ठंडा पड़ने की कहानी का समर्थन करता है। यह बदलाव उन पिछली बाज़ार धारणाओं को चुनौती देता है कि फेडरल रिज़र्व को साल की दूसरी छमाही में आक्रामक दर-वृद्धि रुख बनाए रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
भारतीय और क्षेत्रीय निवेशकों के लिए, मुख्य ध्यान इस बात पर रहेगा कि फेडरल रिज़र्व अपनी आगामी संचार में इस ठंडा पड़ते रुझान की व्याख्या कैसे करता है। यदि गंभीर आर्थिक संकुचन के बिना लेबर मार्केट नरम होना जारी रहता है, तो यह अमेरिकी डॉलर की मज़बूती को सीमित करके उभरते बाज़ार की संपत्तियों को राहत प्रदान कर सकता है। निवेशकों को अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की चाल, सेंट्रल बैंक की टिप्पणियों और जापानी येन में किसी भी आगे की अस्थिरता पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि ये कारक एशियाई बाज़ारों में कैपिटल फ्लो को सीधे प्रभावित करते हैं।
