अरुंधति भट्टाचार्य का बड़ा खुलासा: भारत की कंपनियों में 'जेंडर बायस' विकास में लगा रहा है ब्रेक!

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
अरुंधति भट्टाचार्य का बड़ा खुलासा: भारत की कंपनियों में 'जेंडर बायस' विकास में लगा रहा है ब्रेक!
Overview

पूर्व SBI चीफ और Salesforce India की CEO अरुंधति भट्टाचार्य ने भारतीय कंपनियों में लैंगिक समानता (Gender Equity) के मौजूदा प्रयासों पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह लैंगिक भेदभाव (Gender Bias) न केवल कंपनियों के विकास को रोक रहा है, बल्कि असली सुशासन (Governance) पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

सिर्फ गिनती काफी नहीं, असली समानता चाहिए

अरुंधति भट्टाचार्य की आलोचना केवल बोर्ड में महिलाओं की संख्या गिनने तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि भारतीय कॉर्पोरेट जगत अक्सर SEBI जैसे नियामकों (Regulators) के ज़रूरी नियमों का पालन करने पर ज़्यादा ध्यान देता है, बजाय इसके कि वे विविधता (Diversity) के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता दिखाएं। यह compliance पर अत्यधिक ज़ोर, असल में गहरे सुशासन (Governance) की समस्याओं को छिपा सकता है, जिसका असर लंबी अवधि में कंपनी के वैल्यू और निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है। हालांकि नियमों की वजह से बोर्ड स्तर पर महिलाओं की मौजूदगी बढ़ी है, लेकिन कई कंपनियों में आज भी महत्वपूर्ण प्रबंधन (Management) पदों पर महिलाओं की कमी है।

समानता में ही है बिज़नेस का फायदा

शोध लगातार दिखाते हैं कि नेतृत्व (Leadership) में लैंगिक विविधता (Gender Diversity) बेहतर वित्तीय नतीजों से जुड़ी है। जिन कंपनियों की एग्जीक्यूटिव टीमों में ज़्यादा महिलाएं होती हैं, वे अक्सर ज़्यादा मुनाफा (Profits) और मार्केट रिटर्न कमाती हैं। भारत में, महिला लीडर्स वाली कंपनियों ने 50% तक ज़्यादा प्रॉफिट मार्जिन दिखाया है। इसका मतलब है कि जेंडर बायस (Gender Bias) सिर्फ एक सामाजिक मुद्दा नहीं है; यह एक छूटा हुआ आर्थिक अवसर (Economic Opportunity) है। जो कंपनियां विविध दृष्टिकोणों का उपयोग नहीं करतीं, वे शायद मूल्य खो रही हैं और अपनी विकास क्षमता को बाधित कर रही हैं। बोर्ड में बेहतर लैंगिक विविधता मज़बूत सुशासन (Governance) की ओर भी ले जाती है और वित्तीय कदाचार (Financial Misconduct) के मामलों को कम करती है।

अनजाने पूर्वाग्रहों (Unconscious Bias) की चुनौती

भट्टाचार्य ने एक व्यक्तिगत उदाहरण साझा करते हुए बताया कि कैसे उन्हें खुद अनजाने पूर्वाग्रहों (Unconscious Bias) से निपटने वाले ट्रेनिंग सेशन में मुश्किल हुई। यह दर्शाता है कि ये गहरे बैठे पूर्वाग्रह सभी को प्रभावित करते हैं, चाहे उनका लिंग या पद कुछ भी हो। पूर्वाग्रह के सूक्ष्म रूप, जैसे कि प्रमोशन की समीक्षा के दौरान लोगों से पूछे जाने वाले सवाल, प्रतिभा (Talent) की प्रगति और इनोवेशन (Innovation) को बाधित कर सकते हैं। 'आवरग्लास इफ़ेक्ट' (Hourglass Effect), जहाँ महिलाएं एंट्री लेवल और बोर्ड लेवल पर तो होती हैं, लेकिन मिडिल मैनेजमेंट में मुश्किल से मिलती हैं, यह बताता है कि कंपनियां अपनी महिला प्रतिभा को बनाए रखने और विकसित करने में कहां चूक रही हैं। इस अक्षमता का मतलब है कि कंपनियों को मज़बूत लीडरशिप पाइपलाइन बनाने और तेज़ी से बदलते बाज़ारों के अनुकूल ढलने में संघर्ष करना पड़ता है।

Salesforce का नज़रिया और पिछली सुधार नीतियां

Salesforce India, जहाँ भट्टाचार्य नेतृत्व करती हैं, कंपनी ने ESG लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें विविधता (Diversity) और समान वेतन (Equal Pay) शामिल है। कंपनी वेतन के अंतर को ठीक करने और समावेशी संस्कृति (Inclusive Culture) को बढ़ावा देने वाली पहलों में निवेश करती है। राज्य बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में अपने कार्यकाल को याद करते हुए, उन्होंने पेरेंट्स के लिए सहायता जैसी नीतियों को लागू किया था, जैसे एल्डर-केयर के लिए सवैतनिक अवकाश (Sabbaticals), जिसने देखभाल की ज़िम्मेदारियों से जूझ रहे मूल्यवान कर्मचारियों को बनाए रखने में मदद की।

सुशासन के जोखिम और नियामक बाधाएं

SEBI के विविधता नियमों (Diversity Rules) की आलोचना इस बात पर सवाल उठाती है कि वे कितने प्रभावी हैं। केवल 'चेकलिस्ट' पर ध्यान केंद्रित करना, वास्तविक समावेश (Inclusion) के बजाय, विविधता का सतही रूप बना सकता है। भट्टाचार्य की अपनी स्वीकारोक्ति बताती है कि अनजाने पूर्वाग्रह (Unconscious Bias) कितने गहरे जड़ें जमाए हुए हैं, जिसके लिए सिर्फ बुनियादी ट्रेनिंग से ज़्यादा की ज़रूरत है। जो कंपनियां केवल नियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) पर निर्भर करती हैं, वे 'आवरग्लास इफ़ेक्ट' को बनाए रख सकती हैं, जिससे प्रतिभा का नुकसान और कमज़ोर लीडरशिप पाइपलाइन हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय नियम अब "अत्यधिक सूक्ष्म" (Highly Micro) हो गए हैं और इनोवेशन (Innovation) से पिछड़ सकते हैं, जिससे कंपनियों की तेज़ी से आगे बढ़ने की क्षमता (Agility) और विस्तार (Scaling) बाधित हो सकता है। यह, पूर्वाग्रहों के साथ मिलकर, भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी नुकसान में डाल सकता है। भट्टाचार्य की कार्यस्थल की संस्कृति की टिप्पणी, जो अस्थिर प्रदर्शन (Unsustainable Performance) की मांग करती है, बर्नआउट और उत्पादकता में कमी की ओर भी इशारा करती है। उदाहरण के लिए, Salesforce (CRM) की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (Market Capitalization) वर्तमान में लगभग $149-151 बिलियन है, जिसका P/E रेश्यो (P/E Ratio) 23-24.5 की रेंज में है। ऐसी कंपनियों के लिए निरंतर विकास इन प्रणालीगत मुद्दों को हल करने पर निर्भर करता है। समावेशी वातावरण बनाने में विफलता से कर्मचारी टर्नओवर (Employee Turnover) बढ़ सकता है, इनोवेशन कम हो सकता है और बाज़ार के अवसर चूक सकते हैं।

सच्ची समावेशिता की ओर बढ़ना

जैसे-जैसे कॉर्पोरेट इंडिया ESG फैक्टर पर बढ़ती मांगों और जांच का सामना कर रहा है, भट्टाचार्य जैसे नेता निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि (Insights) प्रदान करते हैं। लगातार सीखना न केवल अनिश्चित दुनिया में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उन संगठनों के लिए भी ज़रूरी है जो सच्ची लैंगिक समानता और मज़बूत सुशासन (Strong Governance) का लक्ष्य रखते हैं। भविष्य उन कंपनियों का होगा जो सतही विविधता (Surface-level Diversity) से आगे बढ़कर ऐसी संस्कृतियां बनाती हैं जो सभी कर्मचारियों को सशक्त बनाती हैं, इनोवेशन को बढ़ावा देती हैं और नैतिक नेतृत्व (Ethical Leadership) का प्रदर्शन करती हैं।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.