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RCom पर ₹2,929 करोड़ का नया बैंक फ्रॉड केस, अनिल अंबानी और कंपनी पर CBI की FIR

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
RCom पर ₹2,929 करोड़ का नया बैंक फ्रॉड केस, अनिल अंबानी और कंपनी पर CBI की FIR
Overview

केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने अनिल अंबानी के रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ **₹2,929 करोड़** के बैंक धोखाधड़ी के आरोप में FIR दर्ज की है। यह नया मामला कंपनी के मौजूदा इंसॉल्वेंसी (insolvency) की कार्यवाही और समूह के कर्ज (debt) की चुनौतियों को और बढ़ाता है।

CBI ने दर्ज की नई FIR

केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ एक नई FIR दर्ज की है। आरोप है कि इन्होंने ₹2,929 करोड़ का बैंक धोखाधड़ी को अंजाम दिया, जिससे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को यह नुकसान हुआ। आपको बता दें कि RCom जून 2019 से कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुजर रही है। SBI की शिकायत, जो अब FIR का हिस्सा है, में फंड के दुरुपयोग और लोन की शर्तों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। बैंक ने RCom के खाते को फ्रॉड (fraudulent) घोषित कर दिया है। इस ताजा कानूनी कार्रवाई से RCom के पुनर्गठन (restructuring) के प्रयासों को झटका लगा है, जिस पर लगभग ₹40,410 करोड़ का भारी कर्ज है (31 दिसंबर 2025 तक)।

RCom की इंसॉल्वेंसी और समूह पर वित्तीय दबाव

एक समय की टेलीकॉम दिग्गज रिलायंस कम्युनिकेशंस गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है, जिस पर कर्ज बढ़ता जा रहा है और परिचालन (operational) समस्याएं भी हैं। इसकी इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया काफी लंबी खिंच गई है, जिसमें लेनदारों (creditors) के लिए रिकवरी की कानूनी लड़ाइयां शामिल हैं। अनिल अंबानी समूह की अन्य कंपनियां भी भारी रेगुलेटरी दबाव में हैं। उदाहरण के लिए, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) डिफॉल्ट के बाद इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया में चली गई है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग (money laundering) जांच के तहत ₹10,117 करोड़ से अधिक की संपत्ति फ्रीज कर दी है। इन कार्रवाइयों से समूह की कई कंपनियों, जिनमें रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड भी शामिल है, में फंड के डायवर्जन (diversion) और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। यह स्थिति मुकेश अंबानी के रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के विपरीत है, जिसका कर्ज लगभग ₹3.47 लाख करोड़ होने के बावजूद, कंपनी मजबूत वित्तीय स्थिति और बाजार में अच्छी पकड़ बनाए हुए है।

टेलीकॉम सेक्टर की चाल और अनिल अंबानी की पिछली मुश्किलें

भारत के टेलीकॉम सेक्टर में बड़े पैमाने पर कंसॉलिडेशन (consolidation) देखा गया है, जिसका नेतृत्व अब रिलायंस जियो (Jio) और भारती एयरटेल (Airtel) कर रहे हैं। ये दोनों कंपनियां बेहतर वित्तीय नतीजे और सब्सक्राइबर बेस में बढ़ोतरी दर्ज कर रही हैं। यह सक्रिय बाजार RCom की मौजूदा इंसॉल्वेंसी की स्थिति के बिल्कुल विपरीत है। ये ताजा कानूनी परेशानियां अनिल अंबानी की पिछली मुश्किलों की याद दिलाती हैं; उन्होंने 2020 में यूके कोर्ट में व्यक्तिगत दिवालियापन (personal bankruptcy) घोषित किया था, और 2019 की शुरुआत तक समूह का मार्केट वैल्यू 68% तक गिर गया था। जांच में CBI सहित कई एजेंसियां शामिल हैं। CBI अनिल अंबानी के बेटे जय(Jai) अनमोल अंबानी से भी RHFL से जुड़े ₹228 करोड़ के कथित धोखाधड़ी मामले में पूछताछ कर रही है।

लगातार आरोप और निवेश की चिंताएं

RCom और RHFL के खिलाफ चल रही FIRs, ED की संपत्ति जब्ती और इंसॉल्वेंसी कार्यवाही चिंताएं बढ़ा रही हैं। RCom का ₹40,410 करोड़ का कर्ज एक बड़ी चुनौती है, और 2019 से एक रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional) इसके बिजनेस को संभाल रहा है। RCom से जुड़ी फर्मों की संपत्ति का अधिग्रहण करने वाली ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Authum Investment & Infrastructure Ltd.) की वित्तीय प्रदर्शन में गिरावट के कारण 30 मार्च 2026 तक उसकी रेटिंग को 'स्ट्रॉन्ग सेल' (Strong Sell) तक डाउनग्रेड कर दिया गया है। भले ही भारतीय बैंकों के NPA (Non-Performing Assets) का स्तर 2025 में घटकर 2.31% हो गया है, लेकिन टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के पुराने मुद्दे अभी भी जोखिम पैदा कर रहे हैं। फंड डायवर्जन, क्रेडिट के लिए गलत बयानी (misrepresentation) और साजिश (conspiracy) जैसे कई आरोपों से यह साफ है कि लेनदारों और हितधारकों (stakeholders) के लिए रिकवरी मुश्किल और अनिश्चित होगी।

कानूनी और इंसॉल्वेंसी की जटिलताओं के बीच अनिश्चित भविष्य

RCom और संबंधित कंपनियों का भविष्य काफी अनिश्चित है, जो चल रही जांचों और जटिल इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के कारण है। लगातार कानूनी और रेगुलेटरी कार्रवाइयां बताती हैं कि किसी भी तरह की बहाली (revival) या समाधान (resolution) का रास्ता लंबा और कठिन होगा। यह लेनदारों के लिए वित्तीय रिकवरी को और जटिल बनाता है और संबंधित व्यवसायों के प्रति निवेशकों की भावना को प्रभावित करता है। कर्ज की भारी राशि और कई धोखाधड़ी के आरोप बताते हैं कि इन संस्थाओं के लिए आगे का सफर चुनौतियों भरा होगा।

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