Anil Ambani पर ED का शिकंजा: ₹40,000 करोड़ के फ्रॉड मामले में संपत्तियां जब्त, दूसरी बार पूछताछ

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Anil Ambani पर ED का शिकंजा: ₹40,000 करोड़ के फ्रॉड मामले में संपत्तियां जब्त, दूसरी बार पूछताछ
Overview

Anil Ambani को एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ के लिए बुलाया है। यह मामला Reliance Communications (RCOM) के कथित **₹40,000 करोड़** के बैंक फ्रॉड से जुड़ा है। ED अब तक **₹15,700 करोड़** से ज़्यादा की संपत्तियां जब्त कर चुकी है, जिसमें अनिल अंबानी का मुंबई वाला घर भी शामिल है, जिसकी कीमत **₹3,716 करोड़** है।

ED का बढ़ता दबाव: दूसरी बार पूछताछ

अनिल अंबानी को गुरुवार, 26 फरवरी 2026 को भारत के प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने दूसरी बार पेश होना पड़ा। यह कार्रवाई उनकी समूह कंपनी Reliance Communications (RCOM) से जुड़े ₹40,000 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जांच को तेज़ कर रही है। ED सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत अनिल अंबानी का बयान दर्ज कर रही है। यह Reliance Group के चेयरमैन के लिए नियामक जांच का एक महत्वपूर्ण चरण है।

ज़ब्त संपत्तियों का बढ़ता अंबार

ED की आक्रामक कार्रवाई का एक और बड़ा सबूत बुधवार, 25 फरवरी 2026 को सामने आया, जब अनिल अंबानी के मुंबई स्थित आलीशान निवास, 'Abode', को ₹3,716.83 करोड़ की कीमत पर प्रोविज़नल अटैचमेंट (अस्थायी ज़ब्ती) कर लिया गया। इस ताज़ा ज़ब्ती के साथ, RCOM फ्रॉड केस में ED द्वारा कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य लगभग ₹15,700 करोड़ तक पहुँच गया है। इससे पहले, दिसंबर 2025 में ₹1,120 करोड़ और जनवरी 2026 में ₹1,885 करोड़ की संपत्तियों को अटैच किया जा चुका था। एजेंसी का आरोप है कि संपत्तियों को 'RiseE Trust' नाम के एक फैमिली ट्रस्ट में जमा किया गया था ताकि व्यक्तिगत देनदारियों और उन बैंकों से बचा जा सके जिनके लोन नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) बन गए थे।

RCOM और RPOWER पर वित्तीय असर

लगातार बढ़ते कानूनी और वित्तीय दबाव का असर Reliance Group की कंपनियों के प्रदर्शन पर भी दिखने लगा है। Reliance Communications (RCOM) की आर्थिक हालत बेहद नाजुक है, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹257 करोड़ है और P/E रेश्यो बेहद नेगेटिव है, जो भारी घाटे का संकेत देता है। कंपनी पहले से ही कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसीडिंग्स (CIRP) से गुज़र रही है। वहीं, Reliance Power (RPOWER) के वैल्यूएशन पर भी सवाल उठ रहे हैं। करीब 37.4x के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहा RPOWER, भारतीय रिन्यूएबल एनर्जी इंडस्ट्री के औसत 24.1x और अपने सीधे मुकाबले वाली कंपनियों के 17.3x के मुकाबले काफी महंगा माना जा रहा है। इतनी ऊंची वैल्यूएशन के बावजूद, कंपनी का सेल्स ग्रोथ धीमा रहा है, रिटर्न ऑन इक्विटी नेगेटिव है और इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो कम है। फाइनेंशियल ईयर 2024-2025 में कंपनी का रेवेन्यू 4% घटा, जबकि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स में 243% की भारी गिरावट आई। Reliance Power और Reliance Infrastructure ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट किया है कि वे RCOM से अलग एंटिटी हैं और उनके बीच कोई बिजनेस या फाइनेंशियल संबंध नहीं है।

गहराता संकट: संरचनात्मक कमजोरियां और फ्रॉड का आरोप

यह पूरा मामला Reliance Group के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। ₹40,000 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड और ₹15,700 करोड़ की ज़ब्त की गई संपत्तियों का पैमाना गहरी वित्तीय कुप्रबंधन और संभावित सिस्टमेटिक रिस्क की ओर इशारा करता है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने RBI के दिशानिर्देशों के तहत RCOM और अनिल अंबानी को 'फ्रॉड' घोषित किया है, जो एक बहुत गंभीर वर्गीकरण है। ED का यह दावा कि निजी ट्रस्टों के ज़रिए संपत्ति को डूब चुके पब्लिक बैंकों से बचाने की कोशिश की गई, यह सब वित्तीय हेरफेर के पैटर्न को दिखाता है। Reliance Power के पास भले ही बड़ा एसेट बेस और डेवलपमेंट के तहत क्षमता हो, लेकिन उसकी वर्तमान वित्तीय स्थिति - महंगी वैल्यूएशन, नेगेटिव ROE, और कमजोर ग्रोथ - ग्रुप से जुड़े मुकदमों के ओवरहैंग के साथ मिलकर निवेशकों के लिए बड़े जोखिम पैदा करती हैं। RCOM का लगातार दिवालियापन और संपत्तियों की ज़ब्ती, रिकवरी की बजाय लगातार वित्तीय संकट की कहानी कहती है।

भविष्य की राह: अनिश्चितता जारी

ED के साथ अनिल अंबानी की लगातार पूछताछ और बड़ी संपत्तियों की ज़ब्ती यह साफ करती है कि Reliance Group पर नियामक दबाव कम होने की उम्मीद नहीं है। बाज़ार की निगाहें इन मामलों के नतीजों, ED की आगे की जांच और ग्रुप की अन्य कंपनियों की वित्तीय सेहत पर पड़ने वाले संभावित असर पर टिकी रहेंगी। जब तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकलता, खासकर जब तक संबंधित कंपनियों की वित्तीय सेहत में ठोस सुधार और मजबूत प्रदर्शन का सबूत नहीं मिलता, तब तक निवेशकों का भरोसा कम ही रहने की संभावना है।

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