AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश
Alphabet अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए $80 अरब डॉलर की इक्विटी पूंजी जुटा रहा है। यह कदम AI की रेस में अपनी जगह बनाए रखने के बढ़ते खर्च को दर्शाता है। इस फंड जुटाने की प्रक्रिया में पब्लिक सेल्स, एट-द-मार्केट प्रोग्राम और $10 अरब डॉलर का Berkshire Hathaway के साथ एक प्राइवेट प्लेसमेंट शामिल है। कंपनी का कहना है कि डिमांड सप्लाई से ज़्यादा है, लेकिन इतने बड़े फंड की ज़रूरत यह बताती है कि Alphabet अब कर्ज के बजाय इक्विटी के ज़रिए अपने कंप्यूटिंग के सपनों को पूरा करने की ओर बढ़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह खर्च मार्जिन बढ़ाएगा या नहीं, इस पर अभी राय बंटी हुई है।
OYO IPO को मिली मंज़ूरी
लंबे इंतजार के बाद, हॉस्पिटैलिटी टेक्नोलॉजी कंपनी PRISM, जो OYO की पेरेंट कंपनी है, को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से अपने IPO के लिए मंज़ूरी मिल गई है। G6 Hospitality के अधिग्रहण के बाद कंपनी के मुनाफे में बढ़ोतरी हुई है। PRISM नए शेयर जारी करके ₹6,650 करोड़ तक जुटाने की योजना बना रही है। $7–8 अरब डॉलर के वैल्यूएशन का लक्ष्य रखते हुए, कंपनी सार्वजनिक ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल करने से पहले बाज़ार की स्थितियों का मूल्यांकन कर रही है। यह लिस्टिंग ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी पर केंद्रित विस्तार की ओर एक संकेत है, हालांकि कंपनी बाज़ार की अस्थिरता को देखते हुए सही समय का इंतज़ार कर रही है।
Vedanta पर रेगुलेटरी शिकंजा
Vedanta के शेयर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दिल्ली और मुंबई स्थित उसके ऑफिसों में की गई छापेमारी के बाद से जांच के दायरे में आ गए हैं। यह जांच कथित तौर पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन से जुड़ी है, जिसमें UK-आधारित पेरेंट कंपनी Vedanta Resources को किए गए रॉयल्टी भुगतान का मामला शामिल है। यह जांच कंपनी के डीमर्जर प्लान को और पेचीदा बना सकती है, जिसके तहत एल्युमीनियम, तेल और गैस, पावर, और आयरन व स्टील कारोबार को अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बांटा जाना है। Vedanta का जटिल क्रॉस-बॉर्डर कैपिटल स्ट्रक्चर इसे लगातार रेगुलेटरी जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाता है। निवेशक इन कानूनी बाधाओं के संभावित प्रभाव और कंपनी की क्रेडिट रेटिंग में हालिया सुधार के बीच संतुलन बना रहे हैं।
सेक्टरों पर असर
कॉर्पोरेट हलचल के अलावा, व्यापक बाज़ार पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ Hormuz में संभावित व्यवधानों से आर्थिक दबाव की चेतावनी ऊर्जा-संवेदनशील सेक्टरों पर भारी पड़ रही है। साथ ही, शिक्षा क्षेत्र में भी प्रशासनिक फेरबदल हुआ है, जहाँ बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन के चेयरमैन और सेक्रेटरी को सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में खरीद अनियमितताओं की जांच के बीच ट्रांसफर कर दिया गया है।
