अफगान-पाकिस्तान ट्रांजिट ट्रेड में 93% की भारी गिरावट: ₹367 मिलियन पर पहुंचा व्यापार

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
अफगान-पाकिस्तान ट्रांजिट ट्रेड में 93% की भारी गिरावट: ₹367 मिलियन पर पहुंचा व्यापार

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच ट्रांजिट ट्रेड (transit trade) में पिछले वित्त वर्ष में भारी गिरावट आई है। यह व्यापार **$367 मिलियन** तक सिमट गया है, जो 2021 में **$5 बिलियन** था। यह **93%** की जबरदस्त कमी काबुल के ईरानी व्यापार मार्गों की ओर रणनीतिक बदलाव का संकेत देती है।

ट्रांजिट ट्रेड में आई रिकॉर्ड गिरावट

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक संबंध एक बड़े बदलाव से गुज़रे हैं। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में ट्रांजिट ट्रेड के मूल्य में 93% की भारी गिरावट आई है। 2021 में जो ट्रांजिट वॉल्यूम $5 बिलियन था, वह पिछले वित्त वर्ष (2025-26) तक घटकर केवल $367 मिलियन रह गया है। कंटेनर ट्रैफिक में भी भारी कमी देखी गई है, जो पिछले वित्त वर्ष में घटकर 11,592 यूनिट रह गया, जबकि पिछले वर्षों में यह आंकड़ा काफी अधिक था।

ईरानी पोर्ट्स की ओर रणनीतिक कदम

विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट सिर्फ सीमा सुरक्षा उपायों पर आधारित नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। काबुल सक्रिय रूप से पाकिस्तानी पोर्ट्स पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है और इसके बजाय ईरानी पोर्ट्स, खासकर चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) का इस्तेमाल कर रहा है। एक समय अफगानिस्तान के सामान के लिए पाकिस्तान मुख्य गेटवे हुआ करता था, लेकिन अब स्पष्ट है कि अफगानिस्तान भू-राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए व्यापार में विविधता लाने को प्राथमिकता दे रहा है।

ऐतिहासिक आंकड़े और वर्तमान रुझान

इस बदलाव की गंभीरता को समझने के लिए, ट्रांजिट ट्रेड के ऐतिहासिक आंकड़ों पर नज़र डालना ज़रूरी है। 2021 में काबुल में राजनीतिक बदलाव से पहले, कंटेनर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा था और $5 बिलियन के मूल्य के साथ लगभग 89,000 कंटेनर तक पहुँच गया था। सरकार बदलने के बाद भी, वित्त वर्ष 2023 में व्यापार $6.7 बिलियन तक बढ़ गया था। हालांकि, इसके बाद रुझान तेज़ी से पलटा और वित्त वर्ष 2025 तक यह $1.36 बिलियन तक गिर गया। वर्तमान वित्त वर्ष के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि 2025 अक्टूबर में सीमा बंद होने से पहले ही यह गिरावट की प्रवृत्ति मज़बूती से स्थापित हो चुकी थी।

क्षेत्रीय आर्थिक प्रभाव

वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स मार्गों की ओर यह कदम महत्वपूर्ण आर्थिक परिणाम लाता है। जहाँ यह अफगानिस्तान को अपनी सप्लाई चेन पर अधिक नियंत्रण प्रदान कर सकता है, वहीं इससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागतें भी बढ़ जाती हैं। इन बढ़ी हुई लागतों से अफगानिस्तान में महंगाई बढ़ने की संभावना है, खासकर उन पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में जो ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तानी बाज़ारों की निकटता पर निर्भर थे। इसके अलावा, सीमा पार वाणिज्यिक गतिविधियों में कमी का दोनों देशों के सीमावर्ती जिलों में रोज़गार और आय पर सीधा असर पड़ा है। जैसे-जैसे व्यापार मार्ग इन नए गलियारों पर स्थिर होंगे, क्षेत्रीय व्यापार विश्लेषकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि क्या ये बढ़ी हुई लॉजिस्टिक्स लागतें अफगान अर्थव्यवस्था के लिए टिकाऊ हैं या वे वस्तुओं की कीमतों में और अधिक बदलाव लाएंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.