Aditya Birla Sun Life AMC के CEO, A. Balasubramanian ने विदेशी निवेशकों के लिए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स हटाने का प्रस्ताव दिया है। इसका मकसद भारत के शेयर बाजार को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना है, खासकर हालिया FII आउटफ्लो और भारत व विकसित देशों के बीच घटते इंटरेस्ट रेट गैप को देखते हुए।
Detailed Coverage
विदेशी निवेश क्यों घटा?
Aditya Birla Sun Life Asset Management Company के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, A. Balasubramanian ने भारतीय सरकार से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के लिए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को खत्म करने पर विचार करने का सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य भारतीय शेयर बाजार को इंटरनेशनल कैपिटल के लिए और अधिक आकर्षक बनाना है, खासकर ऐसे समय में जब भारत अन्य ग्लोबल निवेश डेस्टिनेशन्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है।
यह मांग हाल के दिनों में भारतीय बाजारों से विदेशी संस्थागत निवेशकों के बाहर जाने (outflows) के दौर के बाद आई है। Balasubramanian का कहना है कि भले ही डोमेस्टिक निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी हुई है, लेकिन देश को ग्लोबल कैपिटल के लिए एक अधिक स्वागत योग्य माहौल की जरूरत है। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि भारत और अमेरिका के बीच इंटरेस्ट रेट गैप कम हो गया है, जिससे भारतीय फाइनेंशियल एसेट्स में निवेश करने वाले कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को मिलने वाला रिलेटिव यील्ड एडवांटेज घट गया है।
प्रतिस्पर्धी निवेश का माहौल
Balasubramanian का तर्क है कि जब इंटरनेशनल फर्म्स भारत की तुलना अन्य इमर्जिंग और डेवलप्ड मार्केट्स से करती हैं, तो टैक्सेशन एक बड़ा रोड़ा बना हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन टैक्सेज को हटाने से सरकार के टैक्स रेवेन्यू में बड़ी गिरावट आए बिना एक स्ट्रक्चरल कॉम्पिटिटिव एज मिलेगा। लक्ष्य एक ऐसा फ्रिक्शनलेस इन्वेस्टमेंट फ्रेमवर्क तैयार करना है जो विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करे, लेकिन साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी कैपिटल पर अत्यधिक निर्भर न हो।
टैक्स पॉलिसी का रणनीतिक महत्व
CEO ने सरकार द्वारा पहले उठाए गए कदमों का भी जिक्र किया, जैसे कि कुछ मार्केट-रिलेटेड इनफ्लो पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) की आवश्यकताओं को हटाना। इसे निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया गया। उनका मानना है कि एंट्री बैरियर्स को लगातार कम करना निवेशक भावना (investor sentiment) को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। उनकी राय में, इंटरनेशनल पार्टिसिपेंट्स के लिए ट्रेडिंग की लागत कम करने वाले पॉलिसी बदलाव, ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता के दौर में भी फॉरेन इन्वेस्टमेंट के स्तर को स्थिर करने में मदद कर सकते हैं।
निवेशक भविष्य में सरकारी बजट चर्चाओं या फाइनेंस मिनिस्ट्री से रेगुलेटरी अनाउंसमेंट्स पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि कैपिटल गेन्स टैक्स स्ट्रक्चर में किसी भी संभावित बदलाव के लिए ये मुख्य चैनल होंगे। भारतीय बाजार की लगातार विदेशी निवेश आकर्षित करने की क्षमता व्यापक मैक्रोइकॉनॉमिक ट्रेंड्स पर भी निर्भर करेगी, जैसे कि कॉर्पोरेट अर्निंग्स ग्रोथ और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिरता।
