वैल्यूएशन में आई तूफानी तेज़ी
भारत की अमीरों की लिस्ट में हुए इस बड़े बदलाव की सीधी वजह Adani Group की मार्केट कैपिटलाइजेशन में आई शानदार रिकवरी है। मुश्किल दौर और भारी उठापटक के बाद, इस ग्रुप ने 2026 में लगभग ₹5 लाख करोड़ की मार्केट वैल्यू जोड़ी है। इस वापसी का श्रेय कंपनी के दमदार नतीजों और खवडा (Khavda) में लगी रिन्यूएबल एनर्जी जैसी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की सफल लॉन्चिंग को जाता है। ग्रुप की कुल मार्केट कैप ₹20 लाख करोड़ के करीब पहुंच गई है। Adani Enterprises, Adani Power और Adani Ports जैसी फ्लैगशिप कंपनियां भारत की टॉप 20 लिस्टेड कंपनियों में शामिल हो गई हैं। यह एक साल पहले के मुकाबले निवेशकों का बढ़ा हुआ भरोसा दिखाता है।
कानूनी राहत और संस्थागत निवेश
ग्रुप की किस्मत पलटने की सबसे बड़ी वजह लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवादों का खत्म होना है। मई 2026 में, अमेरिकी न्याय विभाग (U.S. Department of Justice) ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ धोखाधड़ी के सभी आपराधिक आरोपों को सबूतों के अभाव में स्थायी रूप से खारिज कर दिया। इसके साथ ही, ग्रुप के क्षेत्रीय प्रतिबंधों (regional sanctions) के मामले में सेटलमेंट ने विदेशी निवेशकों के सेंटीमेंट से एक बड़ा बोझ हटा दिया है। संस्थागत निवेशकों (Institutional investors) का भरोसा और बढ़ा है, जो कंपनी के प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और FY26 में ₹94,834 करोड़ के रिकॉर्ड EBITDA से और मजबूत हुआ है। खास बात यह है कि ग्रुप ने 3.3x के नेट डेट-टू-EBITDA रेशियो के साथ बैलेंस शीट को अनुशासित रखा है।
एनर्जी दिग्गजों में अंतर
जहां Adani Group का इंफ्रास्ट्रक्चर वाला पोर्टफोलियो इस समय कैपिटल डिप्लॉयमेंट में आगे है, वहीं Reliance Industries एक मुश्किल माहौल में है। पिछले छह महीनों में Reliance के शेयर पर दबाव देखा गया है, जिससे इसकी मार्केट वैल्यू में गिरावट आई है। एनर्जी और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में गहरी पैठ रखने वाली रिलायंस, बाहरी भू-राजनीतिक तनावों (geopolitical tensions) के प्रति संवेदनशील है, जिससे शिपिंग और बीमा लागत बढ़ गई है। Adani के रिन्यूएबल वर्टिकल में जहां 50 GW क्षमता का लक्ष्य 2030 तक है, वहीं Reliance रिटेल, डिजिटल सर्विसेज और पारंपरिक ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में एक व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रही है। यहां मार्जिन में लगातार कमी संस्थागत निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
जोखिम और संरचनात्मक कमजोरियां
वर्तमान आशावाद के बावजूद, बाजार की चाल पर एक गंभीर नजर डालें तो महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। Adani Group के वैल्यूएशन में तेज़ी से हुई बढ़ोतरी इसे ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और अपने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन के लिए सस्ते कैपिटल की उपलब्धता के प्रति बहुत संवेदनशील बनाती है। इसके अलावा, अमेरिकी कानूनी मामला भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन ग्रुप अभी भी अपनी गवर्नेंस और कर्ज चुकाने की क्षमता को लेकर वैश्विक जांच के दायरे में है। वहीं, Reliance Industries को अपने मौजूदा वैल्यूएशन मल्टीपल्स को सही ठहराने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पिछले तीन सालों में इसका ROE उम्मीदों से कम रहा है। दोनों कंपनियां ऐसे सेक्टरों में काम करती हैं जो अत्यधिक लीवरेज्ड (leveraged) और कैपिटल-इंटेंसिव (capital-intensive) हैं, जिससे वे ग्लोबल लिक्विडिटी (liquidity) में किसी भी अचानक संकुचन या भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च प्राथमिकताओं में बदलाव के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।
