Adani बने एशिया के सबसे अमीर, Ambani को पछाड़ा! पर कंपनियों के शेयर का हाल क्या?

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
Adani बने एशिया के सबसे अमीर, Ambani को पछाड़ा! पर कंपनियों के शेयर का हाल क्या?
Overview

गौतम अडानी अब एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं, जिन्होंने मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ दिया है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) के अनुसार, अडानी की नेट वर्थ **$92.6 बिलियन** से अधिक हो गई है। हालांकि, Adani Enterprises जैसी कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर बाजार में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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अडानी का जलवा: एशिया के सबसे अमीर बने

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गौतम अडानी की नेट वर्थ बढ़कर $92.6 बिलियन से ऊपर पहुंच गई है। इस आंकड़े के साथ, उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ दिया है, जिनकी नेट वर्थ $90.8 बिलियन बताई जा रही है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव का माहौल है, जिसने कई अरबपतियों की दौलत को प्रभावित किया है।

Adani Enterprises पर ब्रोकरेज की मिली-जुली राय

व्यक्तिगत दौलत में इस उछाल के बावजूद, अडानी की कंपनियों को लेकर बाजार का रुझान थोड़ा मिला-जुला है। 15 अप्रैल 2026 को Adani Enterprises के शेयर 1.98% चढ़े, लेकिन विश्लेषकों (Analysts) की रेटिंग्स में काफी भिन्नता है। जेफरीज (Jefferies) ने 'बाय' (Buy) रेटिंग तो बरकरार रखी है, लेकिन एयरपोर्ट ट्रैफिक में नरमी और कॉपर बिजनेस की धीमी गति को देखते हुए टारगेट प्राइस को घटाकर ₹2,600 कर दिया है। वहीं, MarketsMOJO ने हाल ही में Adani Enterprises को 'सेल' (Sell) ग्रेड दिया है। कंपनी का टेक्निकल ट्रेंड 'माइल्डली बियरिश' (mildly bearish) बताया जा रहा है, जिसमें 15 अप्रैल 2026 को 87.23% की भारी इंट्राडे वोलेटिलिटी (intraday volatility) देखी गई। Adani Ports भी अप्रैल 2026 की शुरुआत में 52-हफ्ते के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा था।

Reliance Industries पर बाजारी दबाव

दूसरी ओर, मुकेश अंबानी की Reliance Industries को भी बाजार में दबाव का सामना करना पड़ रहा है। 6 अप्रैल 2026 को इसके शेयर 4% से अधिक गिरकर दस महीने के निचले स्तर पर आ गए थे, और कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹18 लाख करोड़ से नीचे चला गया था। इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, Oil-to-Chemicals (O2C) बिजनेस के मार्जिन पर संभावित दबाव और 2 अप्रैल 2026 को अमेरिकी टैरिफ (tariffs) की घोषणा से उपजी व्यापक बाजार की चिंताएं बताई जा रही हैं। विश्लेषकों की आम राय ₹1,500-1,700 के बीच टारगेट प्राइस की है, जो संभावित अपसाइड (upside) का संकेत देता है। हालांकि, गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने 'न्यूट्रल' (neutral) रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है। हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई बिकवाली (sales) ने भी ध्यान खींचा है। Reliance का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 22.97 है, जो तेल क्षेत्र के औसत 13.36 से काफी ऊपर है, जिसका अर्थ है कि निवेशक भविष्य में ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। पिछले तीन महीनों में कंपनी के शेयर 10.62% गिरे, जो इसी अवधि में सेंसेक्स (Sensex) के 12.52% की गिरावट से कुछ बेहतर प्रदर्शन है।

सेक्टर्स के वैल्यूएशन में अंतर

भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का औसत P/E लगभग 26.8x है, जिसमें लार्सन एंड टुब्रो (Larsen & Toubro) जैसी बड़ी कंपनियां 31.07x से 41.3x जैसे ऊंचे मल्टीपल्स पर ट्रेड कर रही हैं। Adani Ports & SEZ, भारत की सबसे बड़ी पोर्ट ऑपरेटर के रूप में अपनी स्थिति के कारण, लगभग 28.1x से 28.59x के P/E पर काम कर रहा है। इसके विपरीत, KNR कंस्ट्रक्शंस और PNC इंफ्राटेक जैसी फर्मों का वैल्यूएशन कम है। वहीं, एनर्जी सेक्टर का औसत P/E अप्रैल 2026 में लगभग 15.13 था। Reliance Industries का P/E 22.97 तेल क्षेत्र के औसत से ऊपर होने के बावजूद, एनर्जी सेक्टर ने पिछले तीन वर्षों में 16% सालाना कमाई में वृद्धि देखी है, जबकि रेवेन्यू सपाट रहा है, जो दक्षता में सुधार का संकेत देता है।

आगे की राह और निवेशक क्या देखें

विश्लेषकों को उम्मीद है कि fiscal year 2027 तक नवी मुंबई एयरपोर्ट (Navi Mumbai Airport) और सौर ऊर्जा परियोजनाओं (solar expansions) जैसे प्रोजेक्ट्स से Adani Enterprises के EBITDA में वृद्धि होगी। हालांकि, वैश्विक तनाव के कारण निकट अवधि के रेवेन्यू और मार्जिन के अनुमानों में 3-7% की कटौती की गई है। Reliance Industries का भविष्य टैरिफ की अनिश्चितताओं और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने पर निर्भर करेगा। हालिया कमजोरी के बावजूद, इसके डिजिटल सर्विसेज (digital services) और रिटेल (retail) जैसे विविध परिचालन लंबे समय तक ग्रोथ को सहारा देने की उम्मीद है। निवेशक दोनों कंपनियों के fiscal year 2026 की चौथी तिमाही के नतीजों (fourth quarter of fiscal year 2026 results) और fiscal year 2027 के मार्गदर्शन (guidance) पर बारीकी से नजर रखेंगे, ताकि निरंतर रिकवरी या मूल्यांकन दबाव के संकेतों का पता चल सके।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.