शेयर बाज़ार में मंदी, Adani Group पर बढ़ा दबाव
आज शेयर बाज़ार में भारी गिरावट देखी गई, जहाँ BSE Sensex 1,456.04 अंक और NSE Nifty 436.30 अंक टूटकर बंद हुए। यह लगातार चौथा दिन था जब भारतीय बेंचमार्क गिरते रहे। विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें, कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली प्रमुख कारण हैं। इस माहौल में, Adani Group के स्टॉक्स भी नहीं संभले। Adani Green Energy करीब 5.87% और Adani Power लगभग 5.63% गिर गए। NDTV, Adani Total Gas, Adani Ports, Adani Energy Solutions और Adani Enterprises जैसे ग्रुप के अन्य स्टॉक्स में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। Adani Group की कंपनियों का कुल मार्केट वैल्यूएशन, जो करीब ₹16.70 लाख करोड़ था, ट्रेडिंग के दौरान काफी कम हो गया।
वैल्यूएशन और कर्ज़ को लेकर चिंताएं?
यह भी समझना ज़रूरी है कि Adani Group की कई कंपनियाँ अपने इंडस्ट्री के दूसरे प्लेयर्स के मुकाबले ऊँचे वैल्यूएशन मल्टीपल्स (Valuation Multiples) पर ट्रेड कर रही हैं। उदाहरण के लिए, Adani Total Gas का P/E रेश्यो लगभग 96.5x है, जो Mahanagar Gas ( 11.8x) और Indraprastha Gas ( 14.0x) से काफी ज़्यादा है। Adani Power का P/E रेश्यो भी 33.5x से 39x के बीच है, जो इंडस्ट्री के मीडियन 19.98x से ज़्यादा है। Adani Green Energy का P/E तो 356x के स्तर पर है, जिससे यह लगता है कि इसका वैल्यूएशन भविष्य की ग्रोथ उम्मीदों पर टिका है। हालांकि, Adani के सीमेंट बिज़नेस, ACC और Ambuja Cements, 10-12x के मामूली P/E पर ट्रेड कर रहे हैं।
Adani Group पर काफी बड़ा कर्ज़ (Debt) भी एक बड़ा रिस्क है, खासकर बढ़ती ब्याज दरों (Interest Rates) और टाइट क्रेडिट (Tighter Credit) के माहौल में। Adani Green Energy की स्ट्रक्चर बहुत ज़्यादा लीवरेज्ड (Leveraged) है, जहाँ डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) 296.2% तक है। Adani Enterprises का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो भी करीब 97.2% है। Adani Ports का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 55.7% के साथ थोड़ा बेहतर है। ग्रुप भारी कर्ज़ पर निर्भर है, जो इसे आर्थिक मंदी और ब्याज दरों में बदलाव के प्रति ज़्यादा संवेदनशील बनाता है।
पिछले विवाद और भविष्य की राह
इसके अलावा, ग्रुप का पिछला रिकॉर्ड भी कुछ विवादों से जुड़ा रहा है, जिसमें Hindenburg Research के शेयर में हेरफेर (Stock Manipulation) और अकाउंटिंग गड़बड़ियों के आरोप शामिल हैं। हाल ही में अमेरिकी अभियोजकों (US Prosecutors) ने गौतम अडानी पर धोखाधड़ी (Fraud) के आरोप भी लगाए थे, हालांकि ग्रुप इन आरोपों से इनकार करता रहा है। ये पुराने विवाद और चल रही जांचें निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकती हैं। ग्रुप का लक्ष्य 2030 तक कुल कर्ज़ को ₹1 लाख करोड़ तक सीमित करना है, जो कर्ज़ कम करने की ज़रूरत को दर्शाता है, लेकिन मौजूदा कर्ज़ स्तर और ग्रोथ प्लान बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
आगे चलकर, Adani Group की कंपनियों को अवसरों और जोखिमों दोनों का सामना करना पड़ेगा। ग्रुप एनर्जी ट्रांज़िशन (Energy Transition) और डेटा सेंटर्स (Data Centers) में $200 बिलियन का निवेश करने की योजना बना रहा है। Adani Green Energy का लक्ष्य 2030 तक 50 GW रिन्यूएबल कैपेसिटी हासिल करना है, जिसके लिए बड़े निवेश और बेहतर एग्जीक्यूशन की ज़रूरत होगी। हालांकि, इन लक्ष्यों को पाने के लिए आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटना, कर्ज़ को मैनेज करना और रेगुलेटरी जांचों (Regulatory Scrutiny) के बीच निवेशकों का भरोसा बनाए रखना ज़रूरी होगा। Analaysts का Adani Green को लेकर अनुमान है कि अगले 12 महीनों में इसमें करीब 4.52% की गिरावट आ सकती है, जो एक सतर्क आउटलुक (Cautious Outlook) की ओर इशारा करता है। बाज़ार अब ग्रुप के कर्ज़ कम करने के प्रयासों और वोलेटाइल आर्थिक माहौल में कर्ज़ चुकाने के लिए कैश फ्लो (Cash Flow) जेनरेट करने की क्षमता पर नज़र रखेगा।
