APY: 9 करोड़ पार! पेंशन योजना में रिकॉर्ड सदस्य जुड़े, सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ा

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
APY: 9 करोड़ पार! पेंशन योजना में रिकॉर्ड सदस्य जुड़े, सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ा
Overview

भारत की अटल पेंशन योजना (APY) ने सदस्यों की संख्या में एक नया रिकॉर्ड बनाया है, यह आंकड़ा **90 मिलियन** (करीब **9 करोड़**) को पार कर गया है। सबसे खास बात यह है कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में रिकॉर्ड **13.5 मिलियन** नए सब्सक्राइबर इस योजना से जुड़े हैं।

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APY ने छुआ नया मेंबरशिप रिकॉर्ड

भारत की अटल पेंशन योजना (APY) ने 21 अप्रैल 2026 तक 90 मिलियन से ज़्यादा एनरोलमेंट का बड़ा मुकाम हासिल किया है। इस योजना ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में रिकॉर्ड 13.5 मिलियन नए सब्सक्राइबर जोड़कर सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी दर्ज की है। मई 2015 में लॉन्च होने के बाद से यह अब तक का सबसे तेज़ विकास है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत के विशाल अनौपचारिक क्षेत्र (informal sector) के लिए APY सामाजिक सुरक्षा के एक प्रमुख कार्यक्रम के तौर पर कैसे अपनी पहुंच और भरोसा बढ़ा रही है।

भारत की सामाजिक सुरक्षा में APY का बढ़ता योगदान

APY का यह विकास भारत के सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के बड़े प्रयासों का हिस्सा है। 2015 में जहां सिर्फ 19% आबादी को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा था, वहीं 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 64.3% हो गया है, जिससे 940 मिलियन से ज़्यादा लोग लाभान्वित हुए हैं। यह योजना खास तौर पर असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए है, जो भारत की कुल वर्कफोर्स का 82% से ज़्यादा है। APY, 60 साल की उम्र के बाद ₹1,000 से ₹5,000 तक की गारंटीड मासिक पेंशन प्रदान करती है। यह उन लोगों के लिए रिटायरमेंट की सुरक्षा सुनिश्चित करती है जिनके पास कोई फॉर्मल पेंशन प्लान नहीं है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने बड़े पैमाने पर आउटरीच, ट्रेनिंग प्रोग्राम और जागरूकता अभियानों के ज़रिए इस विस्तार को गति दी है।

स्कीम के फायदे और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

APY उन लोगों के लिए एक आकर्षक विकल्प है जिन्हें एक निश्चित रिटायरमेंट आय की ज़रूरत है। इसमें गारंटीड पेंशन के अलावा, पति/पत्नी को भी लाभ मिलते हैं और नॉमिनी को निवेश की गई राशि वापस मिल जाती है। महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है; वे कुल सदस्यों का लगभग 48% हैं और FY 2024-25 में नए ज्वॉइनर्स में 55% से ज़्यादा की हिस्सेदारी रखती हैं। यह APY की महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण में भूमिका को दर्शाता है। अक्टूबर 2024 में 70 मिलियन सदस्यों से शुरू होकर, यह अगस्त 2025 तक 81 मिलियन से ज़्यादा हो गई। असंगठित क्षेत्र के अन्य फॉर्मल पेंशन प्लान्स की तुलना में APY की सफलता उल्लेखनीय है। उदाहरण के लिए, APY और नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) मिलकर अनौपचारिक वर्कफोर्स के 2% से भी कम लोगों तक पहुँच पाते हैं, और कई कम आय वाले अकाउंट निष्क्रिय हो जाते हैं। APY ₹48,000 करोड़ से अधिक की संपत्ति का प्रबंधन करती है, जिसमें लॉन्च के बाद से 9.12% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) है, जो इसकी वित्तीय मजबूती को दर्शाता है।

चुनौतियां: सब्सक्राइबरों को जोड़े रखना और वित्तीय चिंताएं

उच्च नामांकन (enrollment) संख्याओं के बावजूद, APY के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि बहुत से सब्सक्राइबर समय पर भुगतान करना बंद कर देते हैं, जिससे उन्हें बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। APY और NPS दोनों में बड़ी संख्या में इनएक्टिव कम आय वाले अकाउंट्स का होना, PFRDA और उसके वित्तीय भागीदारों के लिए सदस्यों को लगातार सक्रिय रखने की चिंता को दर्शाता है। सरकार पेंशन भुगतान की गारंटी देती है, जो सब्सक्राइबरों को निवेश में होने वाले नुकसान से बचाता है। हालांकि, सरकार पर इसका दीर्घकालिक खर्च एक अहम चिंता का विषय है, खासकर बढ़ती बुजुर्ग आबादी और संभावित निवेश रिटर्न गैप्स को देखते हुए। बढ़ती महंगाई और सब्सक्राइबरों को योजना से जोड़े रखने के लिए, पेंशन की गारंटीड सीमा को दोगुना करके ₹10,000 मासिक करने की चर्चाएं चल रही हैं, जिससे सरकार की देनदारियां और बढ़ जाएंगी।

आगे की राह: पैठ बढ़ाना और आर्थिक स्थिरता

PFRDA और उसके बैंकिंग पार्टनर पूरे देश में पेंशन कवरेज बढ़ाने के लिए लगातार आउटरीच कार्यक्रम चला रहे हैं। APY की यह ज़बरदस्त वृद्धि लाखों लोगों के रिटायरमेंट आय को सुरक्षित करने में मदद करती है और स्वैच्छिक बचत की आदत को बढ़ावा देती है, जिससे निम्न-आय वाले परिवारों में वित्तीय अनुशासन बढ़ता है। भारत की बुजुर्ग आबादी लगातार बढ़ रही है, ऐसे में APY इसके सामाजिक सुरक्षा तंत्र का एक और भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की उम्मीद है, जो राष्ट्रीय बचत की आदतों और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को आकार दे सकता है। पेंशन भुगतान बढ़ाने के प्रस्ताव बताते हैं कि योजना को बदलते आर्थिक हालातों के अनुसार ढाला जा रहा है ताकि यह अपनी अहमियत बनाए रखे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.