GCC हायरिंग में AI का दबदबा: अब 'Expansion' नहीं, 'AI Experts' की हो रही ज़्यादा मांग!

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
GCC हायरिंग में AI का दबदबा: अब 'Expansion' नहीं, 'AI Experts' की हो रही ज़्यादा मांग!
Overview

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अपनी हायरिंग की रणनीति बदल रहे हैं। अब वे ज़्यादा लोगों को रखने के बजाय AI से प्रोडक्टिविटी बढ़ाने पर ज़ोर दे रहे हैं। हालांकि, कुल मिलाकर भर्ती में कमी आई है, लेकिन AI और मशीन लर्निंग जैसे स्पेशलाइज्ड टैलेंट की मांग अभी भी तेज़ है, खासकर ऊँची सैलरी वाली नौकरियों में। यह कंपनियों के बीच ऑटोमेशन को अपनाने का संकेत है।

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AI से GCC की रणनीति में बड़ा बदलाव

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में हायरिंग का तरीका बदल रहा है। कंपनियां अब ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को रखने के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके अपनी एफिशिएंसी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। यह बदलाव बड़े आर्थिक समायोजन का संकेत देता है, क्योंकि बिजनेस अब प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के लिए AI को प्राथमिकता दे रहे हैं।

ग्रोथ से ज़्यादा ज़रूरी है प्रोडक्टिविटी

Info Edge की Q4FY26 जैसी हालिया अर्निंग कॉल्स से पता चलता है कि जॉब मार्केट थोड़ा धीमा हो गया है। कुछ बड़े GCCs भर्ती या कर्मचारियों की संख्या कम कर रहे हैं। कंपनियां जनरेटिव AI, ऑटोमेशन और AI एजेंट्स का उपयोग करके एफिशिएंसी में सुधार करना चाहती हैं। यह GCC सेक्टर के एक बड़े ट्रेंड के अनुरूप है, जहां लक्ष्य ऐसे छोटे, लेकिन ज़्यादा असरदार 'टीम' बनाना है जो भविष्य के लिए तैयार स्किल्स से लैस हों। यानी, संख्या से ज़्यादा काबिलियत पर ज़ोर दिया जा रहा है।

AI टैलेंट की मांग अभी भी ऊंची

भर्ती में सामान्य मंदी के बावजूद, AI और मशीन लर्निंग प्रोफेशनल्स की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। खासकर इंजीनियरिंग और अच्छी सैलरी वाली पोजिशन्स की। कंपनियां AI एक्सपर्ट्स की तलाश में हैं, जो सालाना ₹20 लाख से ₹50 लाख तक की सैलरी चाहते हैं। टेक सेक्टर में AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस रोल्स में काफी ग्रोथ दिख रही है। AI इंजीनियरिंग जॉब पोस्टिंग तेज़ी से बढ़ रही हैं, और भारत इस क्षेत्र में ग्लोबल ग्रोथ में सबसे आगे है। वहीं, सामान्य सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट रोल्स में गिरावट देखी जा रही है, जिन्हें अब ऑटोमेशन से संभाला जा रहा है।

धीमी जॉब मोबिलिटी और कॉन्ट्रैक्ट रोल्स में बढ़ोतरी

AI से नौकरियों के जाने के डर और आर्थिक अनिश्चितता के कारण कर्मचारी नौकरी बदलने में ज़्यादा हिचकिचा रहे हैं। इससे एट्रिशन रेट (Attrition Rate) तो कम हुआ है, लेकिन जॉब स्टेबिलिटी बढ़ी है। इसी बीच, GCCs में कॉन्ट्रैक्टुअल और फ्लेक्सिबल स्टाफिंग बढ़ रही है, जिसके 2026 तक 25% रोल्स तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे कंपनियां प्रोजेक्ट की ज़रूरतों के हिसाब से अपनी टीम को एडजस्ट कर सकती हैं, और वे लॉन्ग-टर्म एम्प्लॉयमेंट से ज़्यादा तुरंत स्किल एक्सेस को महत्व दे रही हैं। स्टाफिंग फर्म्स का कहना है कि कई रोल्स के लिए सैलरी की उम्मीदें, लोकेशन प्रेफरेंस और ज़रूरी स्किल्स का मेल न खाने के कारण पोजिशन्स भरना मुश्किल हो रहा है।

संभावित जोखिम और चुनौतियाँ

हालांकि Info Edge ने Q4FY26 के लिए मजबूत फाइनेंशियल नतीजे पेश किए हैं, लेकिन हायरिंग की यह बदलती रणनीति कुछ जोखिम भी पैदा करती है। प्रोडक्टिविटी के लिए AI पर ज़्यादा निर्भरता से स्किल गैप (Skill Gap) पैदा हो सकता है, अगर इसे ठीक से मैनेज न किया जाए। खासकर युवा वर्कर्स, जो लंबे समय तक टिकने को तैयार नहीं होते, उनके साथ यह समस्या ज़्यादा हो सकती है। स्पेशलाइज्ड और अच्छी सैलरी वाले टैलेंट की ऊंची मांग से आय असमानता बढ़ सकती है और सीनियर रोल्स के लिए हायरिंग में बाधाएं आ सकती हैं। स्किल और सैलरी के मिसमैच के कारण पोजिशन्स भरने में आ रही कठिनाई एक गहरी टैलेंट मार्केट समस्या की ओर इशारा करती है, जिसे AI अकेले हल नहीं कर सकता। कॉन्ट्रैक्ट रोल्स का बढ़ना, हालांकि फ्लेक्सिबल है, परमानेंट स्टाफ डेवलपमेंट के साथ बैलेंस न होने पर कर्मचारी लॉयल्टी और नॉलेज रिटेंशन को प्रभावित कर सकता है। Info Edge का प्लेटफॉर्म, Naukri.com, इन ट्रेंड्स को देखने के लिए अच्छी स्थिति में है, लेकिन कम स्पेशलाइज्ड जॉब्स, खासकर युवा वर्कर्स को प्रभावित करने वाली, में हायरिंग का धीमा होना एक चिंता का विषय बना हुआ है।

हायरिंग का भविष्य का आउटलुक

GCCs अब सिर्फ कॉस्ट सेविंग के बजाय कैपेबिलिटी एडवांटेज पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिससे सीनियर और स्पेशलाइज्ड टैलेंट की मांग बढ़ रही है। IT सेक्टर में रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं, और ₹20 LPA से ऊपर की सैलरी ब्रैकेट में मजबूत मांग है। Naukri JobSpeak Index के अनुसार, हायरिंग एक्टिविटी में साल-दर-साल बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, हायरिंग के फैसलों पर AI का लगातार प्रभाव यह बताता है कि स्पेशलाइज्ड स्किल्स पर ज़ोर बना रहेगा और नॉन-स्पेशलाइज्ड फील्ड्स में जॉब क्रिएशन धीमा हो सकता है। भारत के रिक्रूटमेंट मार्केट में एक प्रमुख खिलाड़ी के तौर पर Info Edge इस बदलाव से, खासकर हाई-वैल्यू सेगमेंट्स में, फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.