बाज़ार की शुरुआत में तेज़ी, IT में क्यों बेचैनी?
आज, 25 फरवरी को, भारतीय शेयर बाज़ार एक सकारात्मक शुरुआत के लिए तैयार है। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) 25,671 के पार कारोबार कर रहा है, जो वैश्विक बाजारों, खासकर वॉल स्ट्रीट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर मज़बूत हुए उत्साह को दर्शाता है। इस उम्मीद के विपरीत, पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय इक्विटी सूचकांकों का दो-दिवसीय विजयी क्रम टूट गया था। Nifty 50 1.12% गिरकर 25,424.65 पर बंद हुआ और Sensex 1.28% लुढ़क कर 82,225.92 पर आ गया।
AI का बूस्ट और अमेरिकी बाज़ार का कमाल
वॉल स्ट्रीट पर टेक्नोलॉजी शेयरों में ज़बरदस्त उछाल देखा गया। Nasdaq Composite 1.05%, S&P 500 0.77% और Dow Jones Industrial Average 0.76% चढ़े। AI को लेकर यह नया उत्साह पहले की चिंताओं को पीछे छोड़ता दिख रहा है।
FIIs और DIIs का खेल
24 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹102 करोड़ के शेयर बेचे, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹3,161 करोड़ की खरीदारी कर बाज़ार को सहारा दिया। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी नोट की यील्ड लगभग 4.03% पर स्थिर रही।
IT सेक्टर पर AI का साया
लेकिन इस तेज़ी के बीच, भारतीय IT सेक्टर एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में प्रगति के कारण यह सेक्टर दबाव में है। Nifty IT इंडेक्स में भारी गिरावट आई है, कुछ रिपोर्टों के अनुसार फरवरी 2026 में यह 21% से अधिक सिकुड़ गया है। इस बिकवाली ने अकेले फरवरी 2026 में सेक्टर की मार्केट कैपिटलाइज़ेशन से अनुमानित ₹5.7 लाख करोड़ (लगभग $50 बिलियन) का सफाया कर दिया है।
AI कैसे बिगाड़ रहा IT का खेल?
चिंताएं इस बात पर केंद्रित हैं कि AI कैसे पारंपरिक एप्लीकेशन डेवलपमेंट, मेंटेनेंस और टेस्टिंग जैसी सेवाओं को स्वचालित कर सकता है, जो कई भारतीय IT कंपनियों के 40-70% राजस्व का हिस्सा हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जेनरेटिव AI इन पारंपरिक कार्यों के 25-30% को प्रभावित कर सकता है, जिससे अगले तीन से चार वर्षों में कुल राजस्व में 10-12% की गिरावट आ सकती है।
वैल्यूएशन पर सवाल
जहां Nifty 50 का P/E अनुपात लगभग 22.2 है, वहीं Nifty IT इंडेक्स का P/E 22.4 से 26.9 के बीच है। Infosys (मार्केट कैप ~₹5.6 लाख करोड़) और TCS (मार्केट कैप ~₹9.8 लाख करोड़) जैसे प्रमुख भारतीय IT खिलाड़ी लगभग 18-20x के P/E पर कारोबार कर रहे हैं। वहीं, Cognizant जैसे वैश्विक साथियों का P/E लगभग 12-14x है, और Accenture का 16-17x है। यह वैल्यूएशन का अंतर निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है।
मंदी की आशंका (The Bear Case)
भारतीय IT सेक्टर के लिए मुख्य चिंता AI की विनाशकारी क्षमता है, जो इसके पारंपरिक लेबर-इंटेंसिव, हाई-मार्जिन बिज़नेस मॉडल को सीधे तौर पर खतरे में डालती है। एप्लीकेशन सर्विसेज, जो एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत है, AI कोडिंग एजेंट्स द्वारा ऑटोमेशन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। Jefferies और Citi जैसे विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि आम सहमति (consensus) के विकास अनुमानों (growth estimates) में AI-संचालित जोखिम पूरी तरह से शामिल नहीं हो सकते हैं, जिससे वैल्यूएशन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
इसके अलावा, भारतीय IT राजस्व का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाज़ार से आता है। अमेरिकी रोज़गार डेटा ने फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की उम्मीदों को कम कर दिया है, जो उच्च ब्याज दर वाले माहौल में ग्राहक खर्च को कम कर सकता है।
भविष्य की राह: अवसर या चुनौती?
इन मौजूदा उथल-पुथल के बावजूद, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि 2026 IT सेक्टर के लिए बॉटमिंग-आउट (bottoming-out) चरण का संकेत दे सकता है, जिसमें FY27 के उत्तरार्ध और FY28 में AI सेवाओं के परिपक्व होने के साथ विकास में तेज़ी की उम्मीद है। कंपनियां सक्रिय रूप से AI क्षमताओं में निवेश कर रही हैं, कर्मचारियों को फिर से प्रशिक्षित कर रही हैं, और इस परिवर्तन को नेविगेट करने के लिए साझेदारी बना रही हैं, जिसका लक्ष्य खतरे को अवसर में बदलना है।
उदाहरण के लिए, Infosys FY26 के लिए स्थिर मुद्रा (constant currency) में 0% से 3% के बीच राजस्व वृद्धि का अनुमान लगा रही है, जबकि HCLTech 18-19% के स्थिर EBIT मार्जिन के साथ 2-5% वृद्धि की उम्मीद करती है। हालांकि, Wipro का मार्गदर्शन -3.5% से -1.5% की राजस्व गिरावट के साथ सावधानी बरतने का संकेत देता है। व्यक्तिगत कंपनियों की अनुकूलन क्षमता, AI को मुख्य प्रक्रियाओं में एकीकृत करने और AI-संबंधित अनुबंध हासिल करने की क्षमता भविष्य के प्रदर्शन और निवेशकों के विश्वास को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होगी।