सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में आई यह गिरावट कोई एक घटना का नतीजा नहीं थी, बल्कि यह टेक्नोलॉजी में आने वाले बड़े बदलावों (disruption) और अनिश्चित व्यापार नीतियों (tariff policy) के डर का मिला-जुला असर था। निवेशक सहमे हुए थे, और इसका असर बड़े इंडेक्स से लेकर छोटे शेयरों तक दिखा। इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह AI की बढ़ती क्षमता को लेकर चिंताएं थीं, जिसने स्थापित कंपनियों को खतरे में डाल दिया है, साथ ही व्यापार शुल्कों (tariffs) को लेकर भी नई अनिश्चितता सामने आई।
IBM पर AI का बड़ा झटका
IBM के शेयर सोमवार को बुरी तरह पिटे। स्टॉक में 13% की भारी गिरावट आई, जो अक्टूबर 2000 के बाद सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट थी। इस भारी बिकवाली की वजह AI फर्म Anthropic की एक रिपोर्ट बताई जा रही है, जिसमें कहा गया है कि AI की बढ़ती क्षमता IBM के कुछ प्रमुख बिज़नेस सेगमेंट्स के लिए खतरा बन सकती है। बाजार ने इस खबर पर तुरंत प्रतिक्रिया दी, क्योंकि निवेशक स्थापित कंपनियों के AI को अपनाने की धीमी गति को लेकर चिंतित हैं।
सेक्टरों में भी दिखी घबराहट
AI को लेकर यह डर सिर्फ बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों तक ही सीमित नहीं रहा। माइक्रोसॉफ्ट के शेयर 3% गिरे, जो कि 2.5 ट्रिलियन डॉलर की मार्केट कैप वाली कंपनी के लिए बड़ी गिरावट है। साइबर सिक्योरिटी फर्म CrowdStrike 10% लुढ़क गई। इस गिरावट का असर फाइनेंसियल सेक्टर पर भी दिखा, जहाँ American Express 7% और Mastercard करीब 6% नीचे आ गए। ये कंपनियां भी AI और आर्थिक अनिश्चितता के डर से प्रभावित हुईं।
बढ़ी बेरोजगारी और टैरिफ की चिंता
AI की तेज रफ्तार ने आर्थिक अनिश्चितताओं को भी बढ़ा दिया है। एक रिसर्च रिपोर्ट का अनुमान है कि AI के कारण आने वाले समय में बेरोजगारी दर 10% तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर फिर से सख्त तेवर दिखाए हैं। उन्होंने कहा कि जो देश 'खेल खेल रहे हैं', उन पर 'और ऊंचे शुल्क' लगाए जाएंगे। इससे वैश्विक व्यापार को लेकर और अनिश्चितता बढ़ गई है।
सुरक्षित संपत्तियों में निवेश का दौर
इस बिकवाली के बीच, निवेशकों ने सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों (safe-haven assets) का रुख किया। सोने की कीमतें $5,200 प्रति औंस के पार निकल गईं, जबकि चांदी $88.50 प्रति औंस के करीब कारोबार कर रही थी। वहीं, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई, बिटकॉइन $64,000 के नीचे चला गया।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि AI और अनिश्चित नीतियों का दोहरा दबाव आने वाले समय में बाजार के लिए चुनौती बना रह सकता है। निवेशकों की नजरें अब आर्थिक आंकड़ों और कंपनियों के प्रदर्शन पर टिकी रहेंगी।