एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) ने यात्रियों और एयरलाइंस के लिए एयरपोर्ट फीस को कम करने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में नॉन-एरोनॉटिकल इनकम (जैसे रिटेल, पार्किंग से कमाई) का ज़्यादा इस्तेमाल करके यूजर डेवलपमेंट चार्ज (UDF) को कम करने की बात कही गई है।
एयरपोर्ट ऑपरेटर्स की कमाई पर असर?
AERA ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को एक प्रस्ताव सौंपा है, जिसमें एयरपोर्ट टैरिफ तय करने के तरीकों में बदलाव का सुझाव दिया गया है। इस नई योजना के तहत, एयरपोर्ट्स अपनी नॉन-एरोनॉटिकल कमाई, यानी रिटेल स्टोर, डाइनिंग, विज्ञापन और पार्किंग जैसी जगहों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा फ्लाइट और पैसेंजर्स से वसूले जाने वाले शुल्क को कम करने में इस्तेमाल करेंगे। इससे यात्रियों के लिए यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) काफी कम हो सकती है।
हाइब्रिड टिल से सिंगल टिल की ओर
फिलहाल, भारत में 2016 की नेशनल सिविल एविएशन पॉलिसी (NCAP) के तहत 'हाइब्रिड टिल' सिस्टम लागू है। इसमें एयरपोर्ट ऑपरेटर्स अपनी नॉन-एरोनॉटिकल कमाई का 70% खुद रखते हैं और 30% का इस्तेमाल एयरपोर्ट फीस को क्रॉस-सब्सिडाइज करने के लिए करते हैं। AERA का कहना है कि अब जब एयरपोर्ट सेक्टर परिपक्व हो गया है और ट्रैफिक भी बढ़ा है, तो 'सिंगल टिल' मॉडल की ओर बढ़ने का समय आ गया है। इस मॉडल में, नॉन-एरोनॉटिकल कमाई का ज़्यादा हिस्सा यात्रियों के फायदे के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय उदाहरण और भविष्य की राह
AERA ने इस प्रस्ताव के समर्थन में यूके, फ्रांस और स्पेन जैसे देशों का उदाहरण दिया है, जहां ज़्यादातर 'सिंगल टिल' सिस्टम ही चलता है। इन देशों में यात्रियों और एयरलाइंस के लिए एयरपोर्ट टैरिफ आमतौर पर कम देखे गए हैं। हालांकि, भारत में इस बदलाव को लागू करने के लिए 2016 की नेशनल सिविल एविएशन पॉलिसी में संशोधन की ज़रूरत होगी, जिसमें सरकार और अन्य हितधारकों की महत्वपूर्ण चर्चाएं शामिल होंगी।
निवेशकों और इंडस्ट्री पर प्रभाव
अगर यह बदलाव लागू होता है, तो लिस्टेड एयरपोर्ट ऑपरेटर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों की कमाई की संभावनाओं में फर्क आ सकता है। 'सिंगल टिल' मॉडल से ऑपरेटर्स के कमर्शियल मुनाफे पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, कम एयरपोर्ट शुल्क से एयर ट्रैफिक को बढ़ावा मिल सकता है, जिसका फायदा एयरलाइंस और ग्राउंड सर्विस प्रोवाइडर्स को होगा। निवेशकों को नागरिक उड्डयन मंत्रालय के जवाब और आगे की कानूनी प्रक्रियाओं पर नज़र रखनी चाहिए।
