Middle East संघर्ष का एशिया पर गहराता असर
Middle East में जारी जंग का असर अब एशिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। एशियाई विकास बैंक (ADB) ने एक बड़ा झटका देते हुए एशिया प्रशांत क्षेत्र के लिए अपने आर्थिक ग्रोथ के अनुमानों को काफी कम कर दिया है। ADB का मानना है कि यह टकराव अब सिर्फ एक अस्थायी झटका नहीं, बल्कि 'लंबे समय तक चलने वाले गंभीर व्यवधान' (systemic, long-lasting disruptions) पैदा कर रहा है।
इस वजह से, ADB अब 2026 में एशिया की ग्रोथ 4.7% और 2027 में 4.8% रहने का अनुमान लगा रहा है, जबकि पहले दोनों सालों के लिए 5.1% का अनुमान था। चिंता की बात यह है कि महंगाई का दबाव भी बढ़ रहा है। ADB ने 2026 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2% कर दिया है, जो पहले 3.6% था। यह स्थिति 'धीमी ग्रोथ के साथ बढ़ती महंगाई' (slow growth alongside high inflation) के जोखिम को बढ़ा रही है।
ADB के प्रेसिडेंट Masato Kanda ने इस 'महत्वपूर्ण गिरावट' (significant downward revision) का जिक्र करते हुए कहा कि अब यह मामला सिर्फ अस्थायी बाजार उतार-चढ़ाव से बढ़कर वैश्विक एनर्जी और व्यापार में स्थायी व्यवधानों का बन गया है। इस टकराव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 2026 में औसतन $96 प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि टकराव से पहले यह $69 था। इससे उत्पादन लागत और उपभोक्ता कीमतें दोनों बढ़ रही हैं।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भी इसी चिंता को साझा कर रहा है। IMF ने भी हाल ही में इसी तरह के भू-राजनीतिक मुद्दों के कारण 2026 के लिए वैश्विक ग्रोथ का अनुमान घटाकर 3.1% कर दिया है। एशिया के लिए, खासकर तेल और गैस के आयात के लिए महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों में व्यवधान भी जोखिम बढ़ा रहे हैं।
ADB का यह संशोधित अनुमान दिखाता है कि अन्य वित्तीय संस्थान भी अपनी ग्रोथ उम्मीदों पर फिर से विचार कर रहे हैं। IMF जहां 2026 में वैश्विक ग्रोथ 3.1% रहने का अनुमान लगाता है, वहीं उभरती अर्थव्यवस्थाएं 3.9% बढ़ सकती हैं। S&P Global ने चीन को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र की ग्रोथ 4.5% रहने का अनुमान लगाया है, लेकिन संघर्ष की अवधि से जुड़े जोखिमों की चेतावनी दी है। J.P. Morgan 2026 में एशिया (चीन को छोड़कर) के लिए 4.3% GDP ग्रोथ की उम्मीद करता है, जबकि ING का अनुमान 3.4% है।
ऐतिहासिक रूप से, तेल की कीमतों में तेज बढ़त का एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर गहरा असर पड़ा है, जिससे महंगाई, मंदी और उत्पादकता में कमी आई है, खासकर उन देशों के लिए जो एनर्जी आयात करते हैं। हालांकि, 1970 के दशक से अर्थव्यवस्थाएं इन झटकों से निपटने के तरीकों में बदली हैं, लेकिन मौजूदा चुनौती उच्च एनर्जी लागतों को आर्थिक विस्तार के साथ संतुलित करने की है। एशिया की बड़ी ऊर्जा आयात की जरूरत इसे विशेष रूप से कमजोर बनाती है। फिलीपींस जैसे देश पहले से ही ईंधन की उपलब्धता और लागत पर गंभीर प्रभावों की रिपोर्ट कर रहे हैं।
नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ा जोखिम धीमी ग्रोथ और बढ़ती महंगाई का मेल है। यह एशियाई केंद्रीय बैंकों के लिए एक मुश्किल स्थिति पैदा करता है, जहाँ उन्हें आर्थिक गतिविधि कमजोर होने के बावजूद महंगाई से लड़ने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। IMF सुझाव देता है कि केंद्रीय बैंकों को धैर्य रखना चाहिए और महंगाई की उम्मीदों को स्थिर रखने का लक्ष्य रखना चाहिए, लेकिन अगर उम्मीदें अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगें तो सख्ती करनी चाहिए।
अगर यह संघर्ष जारी रहता है, तो एनर्जी की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, जिससे सप्लाई चेन की समस्याएं और बढ़ सकती हैं और वित्तीय स्थितियां और सख्त हो सकती हैं। एक गंभीर गिरावट की स्थिति में, 2027 तक ग्रोथ 4.0% तक गिर सकती है और महंगाई 7.4% तक पहुंच सकती है। मौजूदा एनर्जी चुनौती को 'कीमतों के असर वाला भौतिक सप्लाई व्यवधान' (physical supply disruption with price consequences) बताया जा रहा है, जिसका मतलब है कि सिर्फ ऊंची कीमतों के बजाय वास्तविक कमी भी हो सकती है, जिसे नीतियों से ठीक करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनावों के कारण रक्षा खर्च में वृद्धि से राजकोषीय दबाव भी बढ़ रहा है। संघर्ष की अवधि और पैमाने के बारे में अनिश्चितता निवेशक के भरोसे और भविष्य के निवेशों पर एक बड़ा असर डाल रही है, जिससे बाजार में व्यापक समायोजन हो सकता है।
वित्तीय संस्थान सावधानीपूर्वक नीतिगत प्रतिक्रियाओं का आह्वान कर रहे हैं। ADB बाजार की अस्थिरता को प्रबंधित करने और महंगाई की उम्मीदों की बारीकी से निगरानी करने की सलाह देता है। यह सबसे अधिक प्रभावित परिवारों के लिए लक्षित सरकारी सहायता और ऊर्जा संरक्षण को भी प्रोत्साहित करता है। IMF की मौद्रिक नीति पर सलाह - धैर्य रखने और अनियंत्रित महंगाई की उम्मीदों के प्रति सतर्क रहने - महत्वपूर्ण है। आगे चलकर, AI और टेक्नोलॉजी निर्यात से होने वाली ग्रोथ ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे कुछ बाजारों को सहारा दे सकती है। हालांकि, 2026 के लिए एशिया के समग्र आर्थिक दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण जोखिम और भिन्नता दिखाई देती है, जो काफी हद तक भू-राजनीतिक विकास पर निर्भर करेगा। मुख्य चुनौती संघर्ष से उत्पन्न लगातार व्यवधानों का प्रबंधन करना है जो क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को खतरे में डालते हैं।
