1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) का इंतजार कर रहे 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए यह खबर अहम है। सरकार ने आयोग के लिए 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (Terms of Reference) को मंजूरी दे दी है और संबंधित नियुक्तियां भी की जा रही हैं।
फिस्कल डेफिसिट पर दबाव का खतरा?
इस आयोग के लागू होने से सरकार के खजाने पर भारी बोझ पड़ने का अनुमान है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, हर साल ₹3.7 लाख करोड़ से ₹3.9 लाख करोड़ तक का अतिरिक्त खर्च हो सकता है। यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 1.1% से 1.2% होगा। इससे केंद्र का फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) अपने मौजूदा लक्ष्य 4.4% से बढ़कर 5% तक पहुंच सकता है। मौजूदा समय में भारत का डेट-टू-जीडीपी रेश्यो (Debt-to-GDP Ratio) भी काफी ऊंचा है, जो 2024-25 में करीब 81-81.9% रहने का अनुमान है। सरकार ने इसे मार्च 2031 तक घटाकर लगभग 50% करने का लक्ष्य रखा है।
महंगाई में कितनी बढ़ेगी 'असली' कमाई?
8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों की नॉमिनल सैलरी (nominal salary) में 20% से 35% तक की बढ़ोतरी का अनुमान है। लेकिन, बढ़ती महंगाई के कारण उनकी असली क्रय शक्ति (real purchasing power) में इजाफा बहुत कम होगा। अनुमान है कि 2027 तक कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) बढ़कर 4.3% तक पहुंच सकता है, जो FY26 में 2.5% रहने का अनुमान है। इस महंगाई को ध्यान में रखते हुए, डियरनेस अलाउंस (Dearness Allowance) के एडजस्टमेंट के बाद रियल वेज इंक्रीज़ (real wage increase) महज़ 13% के आसपास रहने की संभावना है।
यह पिछली पे कमीशन की तुलना में काफी कम है। छठे वेतन आयोग ने जहां कर्मचारियों को 54% की भारी रियल-टर्म सैलरी वृद्धि दी थी, वहीं सातवें वेतन आयोग ने लगभग 14.3% की वृद्धि की थी। ऐसे में, 8वें वेतन आयोग को पिछले आयोगों की तुलना में एक 'मंद प्रोत्साहन' (muted stimulus) माना जा रहा है, जो कर्मचारियों को राहत देने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में बड़े उछाल की उम्मीद नहीं जगाएगा।
ऐतिहासिक सीख और आज की हकीकत
सातवें वेतन आयोग ने भी सरकारी खजाने पर दबाव डाला था और सीपीआई इन्फ्लेशन (CPI inflation) में बढ़ोतरी की थी। पब्लिक सेक्टर (Public Sector) की सैलरी ग्रोथ, प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) की तुलना में काफी बढ़ गई थी। 8वें वेतन आयोग को ऐसे में एक सीमित फिस्कल माहौल का सामना करना पड़ रहा है। FY26-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ रेट 6.5% से 7.4% के बीच रहने का अनुमान है, जो आक्रामक फिस्कल विस्तार के लिए कम गुंजाइश दिखाता है। FY26-27 के लिए 4.3% का फिस्कल डेफिसिट लक्ष्य भी इस सीमा को दर्शाता है।
घपलेबाजों से सावधान!
वेतन वृद्धि की उम्मीद के चलते, कुछ ठग सक्रिय हो गए हैं। वे व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर फर्जी लिंक और APK फाइलें भेजकर सैलरी स्ट्रक्चर का 'प्रीव्यू' देने का दावा कर रहे हैं। ऐसे धोखेबाजों के झांसे में न आएं। ये आपको डेटा चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार बना सकते हैं। सिर्फ सरकारी घोषणाओं पर ही भरोसा करें।
आगे की राह: संतुलन का खेल
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें भले ही अभी आनी बाकी हों, लेकिन सरकार का रुख संतुलन बनाने का दिख रहा है। कर्मचारियों की भलाई और मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता (macroeconomic stability) के बीच सामंजस्य बिठाया जाएगा। उम्मीद है कि सरकार का फोकस इस पर रहेगा कि नॉमिनल बढ़ोतरी ठीक-ठाक हो, लेकिन रियल गेन महंगाई और फिस्कल दबाव को देखते हुए नियंत्रित रहे। अंतिम फैसला और उसके आर्थिक प्रभाव, मंजूर की गई सिफारिशों, सरकारी प्रबंधन और महंगाई के रुझान पर निर्भर करेंगे। एक बात साफ है - पिछले दशकों की तुलना में इस बार फिस्कल प्रोत्साहन (fiscal stimulus) सीमित रहेगा।