एक नई Finsafe सर्वे रिपोर्ट बताती है कि भारत में निवेश तो बढ़ रहा है, लेकिन 69% कर्मचारी आज भी आर्थिक रूप से असुरक्षित हैं। केवल 31% के पास ही पर्याप्त इमरजेंसी सेविंग्स और इंश्योरेंस है, जो नौकरीपेशा वर्ग की वित्तीय सुरक्षा में एक बड़ी खाई को दर्शाता है।
क्या है रिपोर्ट का सच?
भारत में रिटेल निवेशकों की बढ़ती संख्या के बीच, एक बड़ी चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। Finsafe की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 70% नौकरीपेशा लोगों के पास अप्रत्याशित खर्चों से निपटने के लिए पर्याप्त 'इमरजेंसी फंड' या वित्तीय सुरक्षा नहीं है। यह रिपोर्ट 4,500 से ज़्यादा प्रोफेशनल के बीच FY2025-26 के लिए किए गए सर्वे पर आधारित है।
रिपोर्ट बताती है कि भले ही 58% कर्मचारी आज इक्विटी (Equity) और म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) जैसे बाज़ारों में सक्रिय हैं, लेकिन वित्तीय सुरक्षा की बुनियादी ज़रूरतें अधूरी हैं। केवल 31% कर्मचारियों के पास ही ऐसी सेविंग्स और इंश्योरेंस कवर है जो अचानक आने वाली किसी भी बड़ी मुसीबत, जैसे नौकरी छूटना या गंभीर बीमारी, का सामना कर सके।
कौन कितना असुरक्षित?
- 45% कर्मचारी पूरी तरह से अपने एम्प्लॉयर (Employer) द्वारा दिए जाने वाले फायदों पर निर्भर हैं।
- 24% ऐसे हैं जो पूरी तरह से असुरक्षित हैं, उनके पास कोई बड़ा सेविंग बफर नहीं है।
दूसरी बड़ी चुनौतियाँ
लंबी अवधि की वित्तीय सेहत पर कई मोर्चों से दबाव है। 70% सर्वे में शामिल लोगों के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) और बच्चों की पढ़ाई का खर्च सबसे बड़ी चिंता है। इसके अलावा, 30% लोगों ने बताया कि अपने बूढ़े हो रहे माता-पिता की ज़िम्मेदारियां बढ़ गई हैं।
कर्ज़ (Debt) भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जिससे 13% कर्मचारी चाहकर भी कोई सेविंग नहीं कर पा रहे हैं। इसका सीधा मतलब है कि भारी ब्याज़ वाले लोन, लोगों की लंबी अवधि की कैपिटल (Capital) बनाने की क्षमता को खत्म कर रहे हैं।
वित्तीय शिक्षा की दिशा
रिपोर्ट का मानना है कि मौजूदा वित्तीय शिक्षा का तरीका सही नहीं है। कई लोग टैक्स बचाने (Tax Optimisation) या स्टॉक चुनने (Stock Selection) जैसे जटिल विषयों में रुचि रखते हैं, लेकिन उनके पास बजट बनाने (Budgeting) और जोखिम कवर (Risk Coverage) जैसे बुनियादी कदम भी नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना इमरजेंसी फंड के शेयर बाज़ार जैसे जोखिम भरे निवेश में पैसा लगाना, बाज़ार में गिरावट आने पर पैनिक सेलिंग (Panic Selling) का कारण बन सकता है।
