वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 576 लोगों ने ₹100 करोड़ से ज़्यादा की इनकम घोषित की है। यह पिछले 5 सालों में सबसे ज़्यादा है, जो देश के सबसे अमीर टैक्सपेयर्स की कमाई में बड़ी बढ़ोतरी दिखा रहा है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि यह सालाना कमाई है, कुल संपत्ति नहीं।
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5 सालों का रिकॉर्ड टूटा: ₹100 करोड़ से ऊपर कमाई करने वाले 576 भारतीय!
भारत में सबसे ज़्यादा कमाने वालों की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है। संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 576 लोगों ने ₹100 करोड़ से ज़्यादा की ग्रॉस टोटल इनकम (Gross Total Income) घोषित की है। यह संख्या पिछले 5 सालों में सबसे ज़्यादा है, जो दिखाता है कि देश के सबसे अमीर लोगों की कमाई लगातार बढ़ रही है।
इनकम और नेट वर्थ का अंतर समझना ज़रूरी
पब्लिक में अक्सर 'अरबपति' कहे जाने वाले लोगों की बढ़ती संख्या को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब में वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि भारतीय टैक्स कानूनों में 'अरबपति' (Billionaire) की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि यह डेटा टैक्सपेयर्स द्वारा एक साल में घोषित कुल आय को दर्शाता है। यह नेट वर्थ (Net Worth) से बिल्कुल अलग है, जिसमें रियल एस्टेट, शेयर और अन्य निवेशों जैसी सभी संपत्तियों का कुल मूल्य शामिल होता है। यह समझना ज़रूरी है कि ज़्यादा सालाना इनकम का मतलब यह नहीं कि किसी व्यक्ति की कुल संपत्ति कितनी है, क्योंकि टैक्स फाइलिंग सिर्फ आय के प्रवाह को मापती है, कुल जमा हुई संपत्ति को नहीं।
पिछले 5 सालों का ट्रेंड
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ₹100 करोड़ से ज़्यादा की आय घोषित करने वाले लोगों की संख्या में उतार-चढ़ाव रहा है, लेकिन कुल मिलाकर इसमें बढ़ोतरी का रुझान दिखा है। भले ही 2025-26 का आंकड़ा 5 साल का रिकॉर्ड है, लेकिन यह सफर सीधा नहीं रहा। 2023-24 के आकलन वर्ष में ऐसे लोगों की संख्या में थोड़ी गिरावट देखी गई थी, जिसके बाद अब इसमें फिर से उछाल आया है।
अर्थशास्त्री इस तरह की बढ़ती आय रिपोर्ट को धन सृजन और अर्थव्यवस्था में हाई-एंड कमाई के औपचारिकरण के संकेतक के रूप में देखते हैं। बाज़ार के लिए, टॉप-लेवल आय में वृद्धि प्रीमियम कंजम्पशन और लग्जरी एसेट्स की मांग को प्रभावित कर सकती है। आगे, डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के सालाना आंकड़े और भविष्य की संसदीय रिपोर्टें महत्वपूर्ण होंगी, जो आने वाले वर्षों में विभिन्न टैक्स ब्रैकेट में आय वितरण के विकास पर और स्पष्टता प्रदान करेंगी।
