SEBI के सर्कुलर और कंपनी के इंटरनल कोड ऑफ कंडक्ट (Internal Code of Conduct) के तहत, कंपनी के डायरेक्टर्स, ऑफिसर्स, डेजिग्नेटेड एम्प्लॉईज (Designated Employees) और उनके बेहद करीबी रिश्तेदारों को इस विंडो बंद रहने की अवधि के दौरान कंपनी के सिक्योरिटीज (Securities) में किसी भी तरह की ट्रेडिंग करने की सख्त मनाही होगी। यह प्रतिबंध 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा और कंपनी द्वारा अपने ऑडिटेड स्टैंडअलोन (Standalone) और कंसोलिडेटेड (Consolidated) फाइनेंशियल रिजल्ट्स जारी करने के 48 घंटे बाद ही खुलेगा।
यह कदम इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading) की रोकथाम के लिए उठाया जाता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि शेयरधारकों के लिए महत्वपूर्ण, गैर-सार्वजनिक जानकारी (Non-Public Information) जैसे कि वित्तीय नतीजों का ऐलान होने से पहले, कंपनी के अंदरूनी लोग उसका अनुचित लाभ न उठा सकें। यह बाजार की निष्पक्षता (Market Fairness) बनाए रखने और छोटे निवेशकों (Retail Investors) की सुरक्षा के लिए एक अहम कदम है।
2021 में स्थापित Zelio E-Mobility, इलेक्ट्रिक दोपहिया (Two-wheeler) और तिपहिया (Three-wheeler) वाहनों का निर्माण करती है। कंपनी ने अक्टूबर 2025 में BSE SME प्लेटफॉर्म पर अपना IPO लाकर ₹78.34 करोड़ जुटाए थे। हाल ही में, मार्च 2026 में, Motilal Oswal Financial Services ने कंपनी में 1.65% हिस्सेदारी ₹9.8 करोड़ में खरीदी थी, जो संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) की बढ़ती दिलचस्पी का संकेत देता है। वित्तीय वर्ष 2025 के लिए, Zelio ने ₹172 करोड़ का रेवेन्यू रिपोर्ट किया था, जबकि FY26 की पहली छमाही में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹134.78 करोड़ रहा।
कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक नई फैसिलिटी लीज पर लेने की भी योजना बना रही है। Zelio E-Mobility, भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार में Ola Electric, Hero Electric, Ather Energy और TVS Motor Company जैसे बड़े खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बना रही है।
फिलहाल, निवेशकों की निगाहें बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग की तारीख पर टिकी हैं, जिसमें FY26 के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स को मंजूरी दी जाएगी। नतीजों के बाद कंपनी के मैनेजमेंट से मिलने वाली जानकारी और भविष्य की योजनाओं (Future Outlook) पर भी निवेशकों की बारीक नजर रहेगी।
