जहां ग्रुप का कुल मुनाफा बढ़ा है, वहीं APSEZ के स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में 38.52% की बड़ी गिरावट आई है, जो ₹2,916.16 करोड़ से घटकर ₹1,792.80 करोड़ रह गया है. इस गिरावट का मुख्य कारण कुल खर्चों में हुई वृद्धि बताई जा रही है, जो ₹6,247.01 करोड़ से बढ़कर ₹9,173.81 करोड़ हो गया.
कंसोलिडेटेड लेवल पर मजबूत नतीजों और स्टैंडअलोन प्रदर्शन में कमजोरी का यह अंतर बताता है कि कंपनी के मुख्य ऑपरेशंस में लागत का दबाव हो सकता है, लेकिन सब्सिडियरी कंपनियों (सहायक कंपनियों) से मिलने वाला योगदान इस अंतर को पाटने में मदद कर रहा है.
कंपनी ने यह भी बताया है कि कंसोलिडेटेड नॉन-करंट बोरिंग्स (गैर-चालू उधारी) बढ़कर ₹50,424.16 करोड़ हो गई है. पिछले साल यह आंकड़ा ₹35,830.68 करोड़ था, जो ₹14,500 करोड़ से ज्यादा की बढ़ोतरी दिखाता है. इससे ग्रुप पर वित्तीय लीवरेज (वित्तीय भार) बढ़ने के संकेत मिलते हैं.
एक और अहम बात यह है कि कंपनी ने एक नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के खिलाफ US डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) द्वारा लाए गए इंडिक्टमेंट (आरोप पत्र) का भी जिक्र किया है. APSEZ के अनुसार, सिक्योरिटीज फ्रॉड कॉन्स्पिरसी से जुड़े ये आरोप कंपनी के ऑपरेशंस से सीधे तौर पर जुड़े नहीं हैं. लेकिन, यह एक गवर्नेंस और प्रतिष्ठा का जोखिम (Reputational Risk) जरूर है जिस पर निवेशक नजर रखेंगे.
पिछले दो सालों में APSEZ ने आक्रामक ग्रोथ स्ट्रेटेजी अपनाई है, जिसमें पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार और अधिग्रहण शामिल है. इस विस्तार के लिए काफी हद तक कर्ज का सहारा लिया गया है, जिसने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ग्रोथ को सपोर्ट किया है. अब शेयरधारकों को ₹7.50 प्रति शेयर के डिविडेंड की उम्मीद है.
निवेशकों के लिए मुख्य चिंताएं स्टैंडअलोन प्रॉफिट में तेज गिरावट, बढ़ता कर्ज का बोझ, US DOJ इंडिक्टमेंट और SEBI द्वारा चल रही जांचें हैं, जिनसे रेगुलेटरी एक्शन का जोखिम बना हुआ है. FY26 में कंसोलिडेटेड इक्विटी बढ़कर ₹98,981.48 करोड़ हो गई, जो FY25 में ₹64,973.34 करोड़ थी.
आगे चलकर, मैनेजमेंट से स्टैंडअलोन प्रॉफिट में गिरावट के कारणों और रिकवरी प्लान्स पर स्पष्टीकरण की उम्मीद होगी. साथ ही, कर्ज प्रबंधन और US DOJ इंडिक्टमेंट से जुड़े घटनाक्रमों पर भी बाजार की बारीक नजर रहेगी.
