Thomas Cook (India) Limited ने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए अपने कंसॉलिडेटेड टर्नओवर के आंकड़े ₹2,243.97 करोड़ दर्ज किए हैं। कंपनी के बोर्ड ने एक बड़े पुनर्गठन (Restructuring) की योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत, कंपनी अपने रिसॉर्ट और रिसॉर्ट मैनेजमेंट बिजनेस को अपनी सब्सिडियरी Sterling Holiday Resorts Limited (SHRL) में डीमर्ज (Demerge) करेगी, ताकि SHRL एक अलग से लिस्टेड एंटिटी (Listed Entity) के तौर पर कारोबार कर सके।
इस पुनर्गठन की घोषणा 20 मार्च, 2026 को हुई बोर्ड बैठक में की गई। इसके साथ ही, Thomas Cook India अपने इक्विटी शेयर्स (Equity Shares) को कंसॉलिडेट (Consolidate) करेगी, जिसमें ₹1 के 4 मौजूदा शेयर मिलकर ₹4 के 1 नया शेयर बनेंगे। कंपनी अपनी तीन निष्क्रिय सब्सिडियरी - TCVSL, JTSL और BTSL - को भी Thomas Cook India में मर्ज (Merge) करेगी, जिससे कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर सरल हो सके। Thomas Cook India के प्रत्येक शेयरधारक को Sterling Holiday Resorts Limited के 0.81 शेयर दिए जाएंगे। डीमर्ज किए जा रहे रिसॉर्ट बिजनेस ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹70 करोड़ का टर्नओवर दर्ज किया था।
इस डीमर्जर के पीछे मुख्य रणनीति यह है कि Thomas Cook India के ट्रैवल सर्विसेज बिजनेस और Sterling Holiday Resorts के हॉस्पिटैलिटी ऑपरेशंस के लिए अलग-अलग ग्रोथ के रास्ते खोले जाएं। SHRL को अलग करने से कंपनी को शेयरहोल्डर वैल्यू (Shareholder Value) बढ़ाने की उम्मीद है। इससे SHRL को कैपिटल (Capital) जुटाने और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में स्वतंत्र रूप से मौके तलाशने में मदद मिलेगी। वहीं, शेयर कंसॉलिडेशन से Thomas Cook India के अर्निंग्स पर शेयर (EPS) बेहतर होने की संभावना है। निष्क्रिय कंपनियों को मर्ज करने से कंपनी के ओवरहेड्स (Overheads) कम होंगे और ओवरऑल कैपिटल स्ट्रक्चर को सुलझाने में मदद मिलेगी।
पुनर्गठन के बाद, शेयरहोल्डर्स के पास दो अलग-अलग पब्लिकली लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी होगी: एक Thomas Cook (India) Limited, जो ट्रैवल सर्विसेज और फॉरेन एक्सचेंज पर फोकस करेगी, और दूसरी Sterling Holiday Resorts Limited, जो हॉस्पिटैलिटी में अपनी पैठ मजबूत करेगी। Thomas Cook India का शेयर कैपिटल स्ट्रक्चर कंसॉलिडेशन से सरल होगा, और निष्क्रिय एंटिटीज का एकीकरण कंप्लायंस के बोझ को कम करेगा।
इस पूरी योजना को आगे बढ़ाने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI), संबंधित स्टॉक एक्सचेंजों, और दोनों कंपनियों के शेयरहोल्डर्स व क्रेडिटर्स से जरूरी अप्रूवल (Approval) की आवश्यकता होगी। यह पूरा पुनर्गठन लगभग 15-18 महीने में पूरा होने की उम्मीद है। निवेशकों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि कंपनी इन नियामक और शेयरहोल्डर अप्रूवल को कितनी जल्दी हासिल करती है।
