तिमाही नतीजों ने उड़ाई नींद
Sayaji Hotels (Indore) Ltd ने बाजार को चौंकाते हुए मार्च 2026 को समाप्त चौथी तिमाही के नतीजे पेश किए, जिसमें कंपनी के नेट प्रॉफिट (Net Profit) में 96.1% की भारी गिरावट देखी गई। यह मुनाफा घटकर मात्र ₹0.18 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹4.43 करोड़ था। पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) की बात करें तो, रेवेन्यू (Revenue) में 1.1% की मामूली बढ़त के बावजूद, कंपनी का मुनाफा 24.25% गिरकर ₹8.01 करोड़ पर आ गया। इस तिमाही में ₹1.25 करोड़ के 'एक्सेप्शनल चार्जेस' (Exceptional Charges) यानी असाधारण खर्चों ने भी नतीजों पर बुरा असर डाला।
कर्ज का बोझ बेतहाशा बढ़ा
कंपनी की वित्तीय सेहत पर सबसे बड़ी चिंता इसके बढ़ते कर्ज को लेकर है। मार्च 2026 तक कंपनी का नॉन-करंट बोरिंग्स (Non-current Borrowings) यानी लॉन्ग-टर्म कर्ज 260% से ज्यादा बढ़कर ₹94.09 करोड़ हो गया है, जो FY25 में केवल ₹26.06 करोड़ था। यह कर्ज कंपनी की इक्विटी (Equity) के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ा है, जिससे ब्याज का बोझ और वित्तीय जोखिम दोनों बढ़ गए हैं।
कानूनी पचड़े में फंसी कंपनी
कर्ज के इस भारी बोझ के साथ-साथ, कंपनी एक बड़े कानूनी पचड़े में भी फंसी हुई है। अपने प्रमुख इंदौर होटल के लिए जमीन की लीज (Land Lease) को लेकर कंपनी 2017 से कानूनी लड़ाई लड़ रही है। इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी (IDA) ने लीज रद्द कर दी थी, और हालांकि कोर्ट के स्टे ऑर्डर के चलते अभी संचालन जारी है, लेकिन इस 'रिट अपील' (Writ Appeal) का अंतिम नतीजा अभी भी अनिश्चित है। यह विवाद कंपनी की मुख्य संपत्ति और भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम बना हुआ है।
शेयरधारकों और सहकर्मियों पर असर
इन दोनों मोर्चों पर मिली चुनौतियों से शेयरहोल्डर्स (Shareholders) के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। मुनाफा घटने से प्रति शेयर आय (EPS) और डिविडेंड (Dividend) पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, होटल इंडस्ट्री के बाकी बड़े प्लेयर्स जैसे Lemon Tree Hotels और Chalet Hotels, जिन्होंने लागत और कर्ज की चुनौतियों के बावजूद अपने मुनाफे में सुधार किया है, वहीं Sayaji Hotels की स्थिति इस कानूनी विवाद के कारण और भी नाजुक नजर आती है।
आगे क्या देखें?
आगे चलकर, बाजार की निगाहें कंपनी के इन अहम मुद्दों पर रहेंगी: लीज विवाद का समाधान, कर्ज कम करने की रणनीति, कैश फ्लो (Cash Flow) बढ़ाने के तरीके और ऑपरेटिंग खर्चों (Operating Expenses) को काबू में रखना। तिमाही नतीजों में सुधार के संकेत कंपनी के लिए अहम होंगे।