LGT Global Hospitality Limited की Q4 FY26 की मॉनिटरिंग एजेंसी रिपोर्ट (Monitoring Agency Report) ने कंपनी के IPO फंड के इस्तेमाल को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के IPO से जुटाए गए कुल ₹21.92 करोड़ के नेट प्रोसीड्स (Net Proceeds) में से केवल ₹12.86 करोड़ का ही इस्तेमाल किया गया है, जबकि ₹9.06 करोड़ अभी भी अनयूटिलाइज्ड (unutilized) पड़े हैं। इन बचे हुए फंड्स को कंपनी ने फिक्स्ड डिपॉजिट (₹9.24 करोड़) और करंट अकाउंट (₹0.06 करोड़) में रखा है।
सबसे अहम बात यह है कि रिपोर्ट में IPO फंड से वित्तपोषित (funded) किए जा रहे प्रोजेक्ट्स में देरी का खुलासा हुआ है। ऑफर डॉक्यूमेंट (Offer Document) में बताई गई समय-सीमा और असल प्रगति के बीच अंतर देखने को मिल रहा है। इसके अलावा, फंड के इस्तेमाल की अवधि तय करने के लिए कंपनी बोर्ड से औपचारिक मंजूरी (formal board resolutions) का अभाव भी गवर्नेंस (governance) पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। इससे कंपनी की अपनी तय समय-सीमा में उद्देश्यों को पूरा करने की क्षमता पर संदेह पैदा होता है।
LGT Global Hospitality ने अगस्त 2025 में अपना IPO लॉन्च कर ₹28.09 करोड़ जुटाए थे। इन फंड्स का मुख्य उद्देश्य बिजनेस एक्सपेंशन के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure), वर्किंग कैपिटल (Working Capital), और जनरल कॉर्पोरेट पर्पस (General Corporate Purpose) को सपोर्ट करना था।
31 मार्च 2026 तक, इस्तेमाल किए गए ₹12.86 करोड़ का ब्रेकअप इस प्रकार है: कैपिटल एक्सपेंडिचर (₹10.43 करोड़), वर्किंग कैपिटल (₹7.70 करोड़), और जनरल कॉर्पोरेट पर्पस (₹3.79 करोड़)।
इन डेवलपमेंट के मद्देनजर, शेयरधारकों (shareholders) से कंपनी से प्रोजेक्ट में देरी और फंड के उपयोग को लेकर स्पष्टीकरण की उम्मीद की जा रही है। कंपनी के लिए इन विसंगतियों और गवर्नेंस गैप्स को दूर करना महत्वपूर्ण होगा। प्रोजेक्ट में लगातार देरी से कंपनी के ऑपरेशनल रोलआउट और फाइनेंशियल रिटर्न पर असर पड़ सकता है, जिससे निवेशकों का भरोसा कम हो सकता है।
इंडस्ट्री में, Lemon Tree Hotels और Indian Hotels Company Ltd (Taj) जैसी कंपनियाँ भी विस्तार की योजनाओं पर काम कर रही हैं, लेकिन वे आमतौर पर प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन के लिए अधिक परिपक्व फ्रेमवर्क रखती हैं।
आगे चलकर, निवेशकों की नजरें आगामी बोर्ड मीटिंग पर होंगी, जहां मॉनिटरिंग एजेंसी रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी। मैनेजमेंट द्वारा प्रोजेक्ट में देरी के कारणों, संशोधित टाइमलाइन और फंड के इस्तेमाल से संबंधित गवर्नेंस चिंताओं को दूर करने की योजनाओं पर खास ध्यान दिया जाएगा।