नतीजों में देरी, इनसाइडर विंडो बढ़ी
इस शेड्यूल बदलाव के साथ ही, कंपनी ने अपने कर्मचारियों और अंदरूनी लोगों के लिए शेयर ट्रेडिंग पर लगी पाबंदी (insider trading window) को भी 20 अप्रैल, 2026 तक बढ़ा दिया है। इसका मतलब है कि कंपनी के अंदरूनी लोग 20 अप्रैल के बाद ही Eco Hotels के शेयर खरीद-बेच पाएंगे।
इस देरी से निवेशकों को कंपनी के FY26 के ₹1.09 करोड़ के रेवेन्यू और ₹3.55 करोड़ के नेट लॉस (Net Loss) जैसे महत्वपूर्ण वित्तीय आंकड़ों को जानने के लिए एक हफ्ता और इंतजार करना पड़ेगा।
कंपनी की पृष्ठभूमि और चुनौतियां
Eco Hotels, जिसे पहले Sharad Fibres & Yarn Processors Limited के नाम से जाना जाता था, ने फरवरी 2023 में अपना नाम बदलकर होटल सेक्टर में कदम रखा है। कंपनी का फोकस मिड-स्केल और सब-मिडस्केल सेगमेंट पर है।
हालांकि, कंपनी की वित्तीय स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले पांच सालों में इसकी सेल्स ग्रोथ में 41.4% की भारी गिरावट देखी गई है, और हालिया फाइनेंशियल ईयर में भी इसे बड़ा नेट लॉस हुआ है। एक एनालिस्ट फर्म ने तो Eco Hotels को 'Sucker Stock' तक करार दिया है, जो इसकी क्वालिटी और वैल्यू पर सवाल उठाता है। प्रमोटरों की हिस्सेदारी भी केवल 30.4% है, जो पिछले तीन सालों में कम हुई है।
इसके अलावा, जून 2024 में SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने कंपनी के कुछ पुराने मामलों को लेकर सेटलमेंट ऑर्डर जारी किए थे।
मुकाबला और आगे क्या?
भारतीय हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में Eco Hotels का सीधा मुकाबला Indian Hotels Company Ltd, ITC Hotels, Lemon Tree Hotels और Chalet Hotels जैसी बड़ी कंपनियों से है।
निवेशक अब 17 अप्रैल को आने वाले कंपनी के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, ताकि वे कंपनी के प्रदर्शन और भविष्य की योजनाओं को समझ सकें।
