CARE Ratings की बड़ी चिंता: प्रोजेक्ट में देरी और फंड की हेराफेरी
रेटिंग एजेंसी CARE Ratings ने Yajur Fibres लिमिटेड के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) से जुटाए गए पैसों के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी और उसकी सब्सिडियरी (subsidiary) के बड़े प्रोजेक्ट्स में काफी देरी हो रही है। साथ ही, यह भी पाया गया है कि IPO से मिले फंड को क्रेडिट फैसिलिटी (credit facility) वाले पैसों के साथ मिला दिया गया है, जिससे यह पता लगाना मुश्किल हो रहा है कि IPO का पैसा कहाँ इस्तेमाल हुआ है।
प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए मार्च 2027 तक का समय चाहिए
कंपनी ने इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए मार्च 2027 तक का समय मांगा है। कंपनी का कहना है कि ये देरी कुछ ऐसे बाहरी कारणों से हो रही है, जो उनके कंट्रोल में नहीं हैं। इसके अलावा, जरूरी काम के लिए वेंडर्स (vendors) चुनने में गड़बड़ी और सब्सिडियरी की नई ग्रीनफील्ड यूनिट के लिए सरकारी मंजूरी (statutory approvals) मिलने में हो रही देरी भी प्रोजेक्ट की टाइमलाइन पर दबाव डाल रही है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
इन वजहों से कंपनी की प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की क्षमता और पैसों के मामले में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। देरी होने से प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ सकती है और नई प्रोडक्शन कैपेसिटी से आने वाला रेवेन्यू (revenue) भी टल सकता है। अगर इन चिंताओं का ठीक से समाधान नहीं किया गया, तो यह निवेशकों का भरोसा कम कर सकता है और कंपनी की रेगुलेटरी कंप्लायंस (regulatory compliance) को भी प्रभावित कर सकता है।
IPO और एक्सपेंशन प्लान्स का बैकग्राउंड
Yajur Fibres ने जनवरी 2026 में IPO लाकर ₹120.408 करोड़ जुटाए थे। इन पैसों का इस्तेमाल कंपनी अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने, एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने और अपनी सब्सिडियरी के लिए एक नई यूनिट तैयार करने में करना चाहती थी।
आगे क्या देखना होगा?
- कंपनी के बोर्ड का प्रोजेक्ट पूरा होने की समय सीमा को मार्च 2027 तक बढ़ाने के फैसले पर नजर रहेगी।
- सब्सिडियरी की ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के लिए लंबित सरकारी मंजूरियों पर प्रगति देखनी होगी।
- कंपनी को IPO फंड्स के मिश्रण (commingling) के मामले में मैनेजमेंट से स्पष्टीकरण और प्रस्तावित कार्रवाई सुननी होगी।
- वेंडर चुनने में पारदर्शिता और प्रॉस्पेक्टस (prospectus) के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, यह भी देखना अहम होगा।