Tarini International Ltd ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के अपने नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी के स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट (Net Profit) में 69.20% की जोरदार उछाल दर्ज की गई है। पिछले साल ₹29.38 लाख के मुकाबले इस साल यह प्रॉफिट ₹49.71 लाख पर पहुंचा है। यह वृद्धि कंपनी के खर्चों पर नियंत्रण (Expense Management) का नतीजा है।
हालांकि, इन शानदार आंकड़ों के पीछे एक चिंताजनक तस्वीर छिपी है। कंपनी के ऑडिटर ने रिपोर्ट में ₹121.59 लाख के उस निवेश पर सवाल उठाए हैं जो घाटे वाली सब्सिडियरी (Subsidiaries) में किया गया है। ऑडिटर्स की मानें तो, यदि इन सब्सिडियरी के घाटे का प्रोविजन (Provision) बनाया जाता, तो कंपनी को ₹43.20 लाख का स्टैंडअलोन प्री-टैक्स लॉस (Pre-tax Loss) होता, न कि प्रॉफिट।
कंसोलिडेटेड (Consolidated) आधार पर, कंपनी का कुल रेवेन्यू (Revenue) ₹2.49 करोड़ रहा और नेट प्रॉफिट ₹1.65 करोड़ दर्ज किया गया। पूरे साल के लिए स्टैंडअलोन रेवेन्यू में 3.89% की मामूली गिरावट आई और यह ₹2.50 करोड़ पर रहा।
इसके अलावा, Tarini International कुछ गंभीर रेगुलेटरी (Regulatory) और कानूनी पचड़ों में भी उलझी हुई है। कंपनी पर ₹505 लाख का SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) पेनल्टी (Penalty) लगा है, जिसके खिलाफ अपील जारी है। वहीं, 2017 से प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate - ED) द्वारा एक फार्महाउस भी अटैच (Attachment) किया गया है। ये सभी मुद्दे निवेशकों के लिए अनिश्चितता का माहौल बना रहे हैं।
