FY26 में SVS Ventures ने ₹1.02 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जबकि स्टैंडअलोन रेवेन्यू ₹17.33 करोड़ रहा। यह पिछले साल की तुलना में रेवेन्यू में 19,574% की बड़ी बढ़ोतरी है। लेकिन, कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कंपनी के स्टैचूटरी ऑडिटर ने वित्तीय नतीजों पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) जारी किया है, जो गंभीर चिंताओं की ओर इशारा करता है।
ऑडिटर की रिपोर्ट में बड़ी गड़बड़ियां
ऑडिटर की रिपोर्ट में कई बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं:
- फिक्शियस एसेट्स (Fictitious Assets): ऑडिटर को ₹6.32 करोड़ के ऐसे एसेट्स मिले जो अस्तित्व में ही नहीं हैं। कंपनी पर इस रकम को राइट-ऑफ (Write-off) करने का दबाव है।
- अनडॉक्यूमेंटेड रिलेटेड-पार्टी लोन (Undocumented Related-Party Loans): बिना किसी उचित दस्तावेज के ₹18.98 करोड़ का कर्ज रिलेटेड पार्टियों को दिया गया है। इन कर्जों की जांच और स्पष्टीकरण की सख्त ज़रूरत है।
- इन्वेंट्री वैल्यूएशन (Inventory Valuation): इन्वेंट्री के मूल्यांकन के तरीकों पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिससे कंपनी की करंट एसेट्स की असली कीमत पर संदेह पैदा हो गया है।
- ऑडिट ट्रेल सॉफ्टवेयर की कमी (Lack of Audit Trail Software): कंपनी में अनिवार्य ऑडिट ट्रेल (Audit Trail) वाले अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का न होना, वित्तीय नियंत्रण में बड़ी कमजोरी को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए चिंता का सबब
इन चेतावनियों का मतलब है कि निवेशकों को SVS Ventures के नतीजों को बहुत सावधानी से देखना चाहिए। ऑडिटर की इन गंभीर चिंताओं के कारण कंपनी की बैलेंस शीट पर सीधा असर पड़ सकता है और उसकी नेट वर्थ (Net Worth) घट सकती है। इससे शेयरधारकों के भरोसे पर भी सवाल उठता है।
क्या है कंपनी का पिछला रिकॉर्ड?
यह पहली बार नहीं है जब SVS Ventures के वित्तीय रिपोर्टिंग पर सवाल उठे हैं। कंपनी का इतिहास रहा है कि उसे ऐसे मुद्दों का सामना करना पड़ा है। इसी सेक्टर की अन्य कंपनियाँ जैसे Aartex Carpets Limited और Vardhman Holdings Ltd फिलहाल अपने हालिया डिस्क्लोजर में ऑडिटर की ऐसी गंभीर चेतावनियों से मुक्त दिख रही हैं।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशक अब कंपनी के मैनेजमेंट का जवाब, फिक्शियस एसेट्स को राइट-ऑफ करने की प्रक्रिया, रिलेटेड-पार्टी लोन के बारे में स्पष्टीकरण और आंतरिक नियंत्रण को मज़बूत करने के कदमों पर बारीकी से नज़र रखेंगे।
