Nakoda Group का बड़ा कदम: ₹24.36 करोड़ जुटाने की तैयारी, 13 मई को EGM में होगी वोटिंग
Nakoda Group of Industries Ltd ने बाजार को सूचित किया है कि वह 87,00,000 (87 लाख) कन्वर्टिबल वारंट्स प्रेफरेंशियल बेसिस पर इश्यू करने की योजना बना रही है। इस इश्यू का प्रति वारंट प्राइस ₹28 तय किया गया है, जिससे कंपनी का लक्ष्य कुल ₹24.36 करोड़ जुटाना है।
फंड्स का इस्तेमाल कहां होगा?
इस कैपिटल इन्फ्यूजन से जुटाए गए पैसों में से ₹18.02 करोड़ कंपनी अपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करेगी। बाकी बचे ₹6.09 करोड़ को जनरल कॉर्पोरेट पर्पज के लिए आवंटित किया जाएगा।
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह कदम कंपनी की फाइनेंसियल पोजीशन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह फंड्स कंपनी के ऑपरेशंस और अन्य बिजनेस एक्टिविटीज को सपोर्ट करने में मदद करेंगे। हालांकि, निवेशकों को यह भी समझना होगा कि वारंट्स के इश्यू और उनके बाद इक्विटी शेयर्स में कन्वर्ट होने पर मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी (स्टेक) कम हो सकती है, यानी शेयर डाइल्यूशन का रिस्क रहेगा।
कंपनी का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड:
Nakoda Group, जो मुख्य रूप से टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग में है, ने हाल के वर्षों में एग्रो-कमोडिटीज और FMCG प्रोडक्ट्स जैसे क्षेत्रों में भी कदम रखा है। कंपनी ने इससे पहले सितंबर 2023 और मई 2024 में राइट्स इश्यू के जरिए फंड जुटाए थे। इन प्रयासों के बावजूद, कंपनी का फाइनेंशियल परफॉरमेंस चुनौतीपूर्ण रहा है। इसके मुनाफे में गिरावट आई है, घाटा बढ़ा है, कर्ज में वृद्धि हुई है और प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करना एक लगातार चुनौती बनी हुई है। 17 अप्रैल 2026 तक, कंपनी की इन्वेस्टमेंट रेटिंग 'Sell' थी, जिसका मुख्य कारण उसकी फंडामेंटल कमजोरी और हाई लेवरेज (बहुत ज्यादा कर्ज) को बताया गया था।
जोखिम और चिंताएं:
शेयरधारकों को 13 मई 2026 को होने वाली एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में इस वारंट इश्यू पर महत्वपूर्ण वोटिंग करनी होगी। अगर प्रस्ताव मंजूर होता है, तो कंपनी को अतिरिक्त पूंजी मिलेगी, जो उसके बैलेंस शीट को सहारा दे सकती है। हालांकि, वारंट्स के एक्सरसाइज होने पर नए इक्विटी शेयर्स इश्यू किए जाएंगे, जिससे मौजूदा शेयर होल्डिंग स्ट्रक्चर में बदलाव आएगा।
कंपनी ने यह भी बताया है कि फंड के इस्तेमाल में +/- 10% का विचलन संभव है, जो बाहरी कारकों पर निर्भर करेगा। यह फंड के इस्तेमाल में कुछ अनिश्चितता का संकेत देता है।
इसके अलावा, Nakoda Group का SEBI के साथ भी पुराना नाता रहा है। कंपनी पर देर से वित्तीय परिणाम देने और टेकओवर रेगुलेशन का पालन न करने जैसे विभिन्न कंप्लायंस लैप्स के लिए पेनाल्टी लगाई गई है। 2018 में एक बैंक फ्रॉड केस में ₹2,107 करोड़ के कथित लोन डिफॉल्ट के संबंध में एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने ₹375.71 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच की थी।
चिंता की एक और बात यह है कि कुछ शेयरधारकों द्वारा कॉल मनी का भुगतान न करने के कारण कंपनी को पार्टली पेड राइट्स इक्विटी शेयर्स की फोरफीचर (जब्ती) करनी पड़ी है। यह स्थिति कुछ शेयरधारकों की वित्तीय तंगी या कंपनी के समग्र कैपिटल मैनेजमेंट में दिक्कतों को दर्शाती है।
आगे क्या देखें:
निवेशकों को 13 मई 2026 को होने वाली EGM के नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। साथ ही, प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट को अंतिम रूप देने के लिए आवश्यक रेगुलेटरी अप्रूवल्स को ट्रैक करना महत्वपूर्ण होगा। यह भी देखना होगा कि वारंट अलॉटीज वारंट्स का एक्सरसाइज कैसे करते हैं और कंपनी नए शेयर कैसे अलॉट करती है।
