क्यों बंद हो रही है ट्रेडिंग विंडो?
SEBI (Securities and Exchange Board of India) के नियमों के तहत, लिस्टेड कंपनियों को अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा से पहले एक निश्चित अवधि के लिए अपनी 'ट्रेडिंग विंडो' बंद करनी होती है। Nagreeka Exports भी इसी प्रक्रिया का पालन कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति को अंदरूनी (Unpublished Price Sensitive Information) या गोपनीय जानकारी का फायदा उठाकर शेयर की खरीद-बिक्री करने का मौका न मिले। इस अवधि के दौरान, कंपनी के डायरेक्टर्स, प्रमोटर्स और उनके करीबी रिश्तेदारों को कंपनी के शेयर्स खरीदने या बेचने की इजाजत नहीं होती है।
कंपनी की पिछली परफॉरमेंस और रेगुलेटरी मुद्दे
Nagreeka Exports, जो टेक्सटाइल (Textile) सेक्टर में काम करती है, ने हाल ही में मिले-जुले नतीजे पेश किए हैं। दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 22.25% बढ़कर ₹128.30 करोड़ रहा, लेकिन नेट प्रॉफिट (Net Profit) 28.74% घटकर ₹0.62 करोड़ पर आ गया। मार्च 2026 में कंपनी का शेयर अपने 52-वीक लो (52-week low) यानी ₹20.5 के स्तर पर भी देखा गया।
यह पहली बार नहीं है जब कंपनी या उसके अधिकारी रेगुलेटरी जांच के दायरे में आए हैं। अगस्त 2023 में, SEBI ने Nagreeka Capital and Infrastructure Limited और इसके एग्जीक्यूटिव चेयरमैन Sushil Patwari पर Rupa & Company के शेयर्स में इनसाइडर ट्रेडिंग के उल्लंघन के लिए ₹10 लाख का जुर्माना लगाया था। इसके अलावा, जून 2025 में NSE ने एक बोर्ड मीटिंग की सूचना में देरी के लिए Nagreeka Exports पर ₹10,000 का फाइन लगाया था।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
ट्रेडिंग विंडो बंद होने के बाद, निवेशक अब कंपनी की बोर्ड मीटिंग की तारीख का इंतजार करेंगे, जिसमें FY26 के फाइनल ऑडिटेड नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। शेयर बाजार इन नतीजों पर बारीकी से नजर रखेगा ताकि कंपनी के प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं का आकलन किया जा सके।
