लक्ष्मी मिल्स को मिली बड़ी राहत
लक्ष्मी मिल्स कंपनी लिमिटेड ने बाज़ार को बड़ी ख़ुशख़बरी दी है। कंपनी ने कन्फर्म किया है कि वह आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 'लार्ज कॉर्पोेट' (Large Corporate) की परिभाषा के दायरे में नहीं आएगी। इसका मतलब है कि कंपनी को SEBI (सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के उन विशेष और कड़े नियमों का पालन नहीं करना पड़ेगा जो बड़े कॉरपोरेशन्स पर कर्ज़ (debt) जुटाने के लिए लगाए जाते हैं।
SEBI के नियमों से कैसे मिली छूट?
SEBI के नियमों के अनुसार, 'लार्ज कॉर्पोेट' कंपनियों के लिए यह ज़रूरी है कि वे अपने कुल कर्ज़ (incremental borrowings) का कम से कम 25% डेट सिक्योरिटीज़ (debt securities) के ज़रिए ही जुटाएं। इसके अलावा, उन्हें कई तरह के अतिरिक्त डिस्क्लोजर (disclosure) और अनुपालन (compliance) के नियमों का भी पालन करना पड़ता है।
लक्ष्मी मिल्स ने BSE को भेजी अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2026 को समाप्त होने वाले साल के लिए उसके वित्तीय आंकड़े उसे 'लार्ज कॉर्पोेट' स्टेटस के लिए पात्र नहीं बनाते। कंपनी ने 2024-25 और 2025-26 की अवधि के लिए 'Nil' या 'Not Applicable' का उल्लेख किया है, जिसका अर्थ है कि उस अवधि में उस पर कोई कर्ज़ की देनदारी नहीं है, या यह इस वर्गीकरण के लिए प्रासंगिक नहीं है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति और पृष्ठभूमि
1910 में स्थापित, लक्ष्मी मिल्स कोयंबटूर स्थित एक प्रमुख टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर है। कंपनी मुख्य रूप से धागे (yarn) और कपड़े (fabric) के उत्पादन, कपड़ों और गारमेंट्स के व्यापार के साथ-साथ रेंटल सर्विसेज में भी सक्रिय है।
कंपनी की एक खास बात यह है कि इसने हमेशा अपना डेट-टू-इक्विटी रेशियो (debt-to-equity ratio) काफी कम रखा है। FY24 में, कंपनी पर ₹739 मिलियन (लगभग ₹74 करोड़) का लॉन्ग-टर्म डेट था, जबकि उसकी कुल इक्विटी ₹868.70 करोड़ थी। इस तरह, कंपनी का गियरिंग रेशियो (gearing ratio) सिर्फ 0.15 रहा, जो इसे SEBI के 'लार्ज कॉर्पोेट' वर्गीकरण की सीमा से नीचे रखता है।
'नॉन-लार्ज कॉर्पोेट' स्टेटस का मतलब
इस स्टेटस के कारण, लक्ष्मी मिल्स FY2025-26 के लिए डेट जारी करने से जुड़े SEBI के विशेष नियमों से मुक्त रहेगी। कंपनी पर कर्ज़ जुटाने के लिए 25% का अनिवार्य लक्ष्य नहीं होगा, और न ही उसे 'लार्ज कॉर्पोेट' से जुड़े अतिरिक्त डिस्क्लोजर नियमों का पालन करना होगा। कंपनी का कर्ज़ जुटाने का तरीका सामान्य कॉरपोेट बोर्रोइंग गाइडलाइंस (corporate borrowing guidelines) के तहत ही जारी रहेगा।
आगे क्या देखना होगा?
टेक्सटाइल सेक्टर में लक्ष्मी मिल्स के साथ अरविंद लिमिटेड (Arvind Limited) और रेमंड लिमिटेड (Raymond Limited) जैसी बड़ी कंपनियाँ भी हैं, जो अपने आकार के कारण 'लार्ज कॉर्पोेट' नियमों के तहत आ सकती हैं।
निवेशकों को कंपनी की भविष्य की डेट इश्यूअंस (debt issuance) योजनाओं और उसकी कम लीवरेज (low-leverage) वाली वित्तीय रणनीति पर नज़र रखनी चाहिए। साथ ही, यह देखना दिलचस्प होगा कि सेक्टर की अन्य बड़ी कंपनियाँ अपने 'लार्ज कॉर्पोेट' स्टेटस और कर्ज़ जुटाने की रणनीति को कैसे मैनेज करती हैं।
