सब्सिडियरी में भारी राइट-डाउन का असर
DCM Nouvelle के स्टैंडअलोन नतीजों पर सबसे बड़ा असर उसकी सब्सिडियरी DCM Nouvelle Specialty Chemicals Limited में किए गए ₹35.61 करोड़ के राइट-डाउन का पड़ा। इस बड़े राइट-डाउन ने पूरे साल के मुनाफे को भारी नुकसान में बदल दिया।
तिमाही नतीजों में मिलाजुला संकेत
अगर चौथी तिमाही (Q4 FY25) की बात करें, तो कंपनी ने ₹7.71 करोड़ का स्टैंडअलोन प्रॉफिट कमाया, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹7.14 करोड़ से थोड़ा बेहतर है। लेकिन, कंसोलिडेटेड लेवल पर यह तिमाही प्रॉफिट घटकर ₹3.97 करोड़ रह गया। पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY25) की बात करें तो कंसोलिडेटेड प्रॉफिट भी पिछले साल के ₹17.51 करोड़ से गिरकर सिर्फ ₹1.64 करोड़ पर आ गया।
रेवेन्यू में भी आई गिरावट
नुकसान का एक और कारण रेवेन्यू में आई कमी भी रही। कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में 4.65% घटकर ₹1,016.60 करोड़ पर पहुंच गया। इसके अलावा, नए लेबर कोड के लागू होने से जुड़े ₹1.86 करोड़ के खर्चे भी स्टैंडअलोन नतीजों पर भारी पड़े।
आगे की राह और निवेशकों का फोकस
DCM Nouvelle भारतीय सिंथेटिक टेक्सटाइल सेक्टर की एक अहम कंपनी है और DCM Shriram Group का हिस्सा है। कंपनी टेक्सटाइल के साथ-साथ स्पेशियलिटी केमिकल्स में भी विस्तार कर रही है। हालांकि, FY25 के नतीजे Vardhman Textiles और Welspun India जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कमजोर रहे हैं। ऐसे में, निवेशकों की नजर अब कंपनी की लागत प्रबंधन, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और रेवेन्यू ग्रोथ को फिर से पटरी पर लाने की रणनीति पर होगी।