इनसाइडर ट्रेडिंग पर लगाम
SEBI (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 के तहत, Banaras Beads Limited ने यह अहम कदम उठाया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी के अंदरूनी लोगों, जैसे डायरेक्टर्स, प्रमोटर्स और उन कर्मचारियों को, जिनके पास अभी तक सार्वजनिक न हुई वित्तीय जानकारी है, उन्हें नतीजों के ऐलान से पहले कंपनी के शेयर खरीदने या बेचने का मौका न मिले। यह कदम बाजार में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ज़रूरी है।
आगे क्या होगा?
कंपनी जल्द ही बोर्ड मीटिंग की तारीख की घोषणा करेगी, जहाँ वित्तीय वर्ष 2025-26 के नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। नतीजों के सार्वजनिक होने के 48 घंटे बाद ही ट्रेडिंग विंडो फिर से खुलेगी। निवेशक अब इनवेस्टरों की नज़रें बोर्ड मीटिंग की तारीख और मार्च 2026 में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के फाइनल नंबर्स पर टिकी हैं।
कंपनी का परिचय
Banaras Beads Limited, जिसे भारत सरकार ने 'एक्सपोर्ट हाउस' का दर्जा दिया है, 1940 से हैंडीक्राफ्ट और ज्वैलरी सेक्टर में एक मजबूत पहचान रखती है। यह भारत की सबसे बड़ी ग्लास बीड्स (कांच के मोती) और फैशन ज्वैलरी निर्माता है। कंपनी दुनिया भर के 80 से ज़्यादा देशों में अपने प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करती है और Walmart व Michaels जैसे प्रमुख ग्लोबल रिटेलर्स को सप्लाई करती है।
हालिया वित्तीय प्रदर्शन
31 मार्च, 2025 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर में, Banaras Beads Limited का रेवेन्यू ₹31.56 करोड़ और नेट प्रॉफिट ₹3.09 करोड़ रहा था। वहीं, दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तिमाही (Q3 FY26) में, कंपनी का रेवेन्यू ₹8.15 करोड़ और मुनाफा ₹0.58 करोड़ दर्ज किया गया था।
अन्य अहम बातें
यह भी ज़िक्र करना ज़रूरी है कि कंपनी के खिलाफ एक नियामक आदेश के तहत ₹1 लाख का जुर्माना लगाने का मामला है, जिसके खिलाफ एक अपील पेंडिंग है। इसका नतीजा अभी आना बाकी है।
