लिक्विडेशन के बीच फाइलिंग में नाकाम
Ashapura Intimates Fashion Ltd ने 15 अप्रैल, 2026 को यह साफ कर दिया है कि वह 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए SEBI रेगुलेशन 74(5) का कन्फर्मेशन सर्टिफिकेट जमा करने में असमर्थ है। कंपनी अक्टूबर 2020 से लिक्विडेशन की कार्यवाही का सामना कर रही है।
क्यों अहम है यह जानकारी?
SEBI रेगुलेशन 74(5) के तहत लिस्टेड कंपनियों को अपने रजिस्ट्रार से डिमेटेरियलाइज्ड सिक्योरिटीज (dematerialized securities) के प्रोसेसिंग के कन्फर्मेशन सर्टिफिकेट लेने होते हैं। यह शेयरधारकों के लिए पारदर्शिता और सही रिकॉर्ड रखने के लिए जरूरी है।
Ashapura Intimates का यह सर्टिफिकेट न दे पाना, खासकर लिक्विडेशन के दौरान, कंपनी के संचालन और नियमों के पालन में एक बड़ी चूक को दर्शाता है। मौजूदा शेयरधारकों के लिए, यह कंपनी की गंभीर वित्तीय स्थिति की पुष्टि करता है और यह बताता है कि उनके निवेश के डूबने की संभावना बहुत अधिक है, क्योंकि कंपनी अपना कामकाज समेट रही है।
पृष्ठभूमि
Ashapura Intimates Fashion Limited काफी समय से गंभीर वित्तीय समस्याओं से जूझ रही है और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के 5 अक्टूबर, 2020 के आदेश के बाद से लिक्विडेशन की प्रक्रिया में है।
कंपनी ने FY18-19 की तीसरी तिमाही के बाद से अपने ऑपरेशंस से शून्य रेवेन्यू (zero revenue) रिपोर्ट किया है। कंपनी के ऑडिटर ने FY26 के लिए एक डिस्क्लेमर ऑफ ओपिनियन (disclaimer of opinion) जारी किया था, जिसमें संदिग्ध धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन, रिलेटेड पार्टी नियमों के उल्लंघन और कंपनी के चलते रहने की व्यवहार्यता पर संदेह जताया गया था।
FY26 की Q3 में ₹302.02 करोड़ का मुनाफा दिखाया गया था, लेकिन यह कर्ज माफ होने (debt write-off) का एक अकाउंटिंग एंट्री (accounting entry) था, न कि ऑपरेशनल कमाई। SEBI ने भी पहले कंपनी पर डिस्क्लोजर नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाया था।
कंपनी को समेटने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, फरवरी 2025 तक ई-ऑक्शन (e-auction) के बाद Grow House Agro (GHAL) को कंपनी के संपूर्ण अधिग्रहण के लिए सफल बोलीदाता घोषित किया गया था। प्रॉपर्टीज जैसी संपत्तियों की बिक्री सहित लिक्विडेशन प्रक्रिया अभी चल रही है।
आगे क्या?
- शेयरधारकों को अब यह स्वीकार करना होगा कि कंपनी के अंतिम विघटन की ओर बढ़ने के साथ उनके निवेश के पूरी तरह से डूबने की संभावना बहुत अधिक है।
- जरूरी रेगुलेटरी फाइलिंग को पूरा करने में विफलता कंपनी के ऑपरेशनल पतन का संकेत देती है।
- लगातार नियमों का पालन न करने पर अतिरिक्त रेगुलेटरी जांच और संभावित जुर्माने की उम्मीद है।
