MTNL ने SEBI के 'लार्ज कॉर्पोरेट' के नियमों को दरकिनार कर दिया है। यह कंपनी ₹36,314 करोड़ के भारी कर्ज़ के बावजूद, अपनी कमजोर क्रेडिट रेटिंग ('CARE D') के चलते इन कड़े नियमों से बच निकली है।
SEBI के नियमों के अनुसार, 'लार्ज कॉर्पोरेट' का दर्जा पाने के लिए कंपनियों को विशिष्ट वित्तीय मापदंडों और 'AA' या उससे ऊपर की क्रेडिट रेटिंग को पूरा करना होता है। MTNL के कुल ₹36,314 करोड़ के बकाया उधार में ₹24,071 करोड़ बॉन्ड के ज़रिए और ₹9,263 करोड़ बैंक लोन के ज़रिए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसके बैंक लोन की क्रेडिट रेटिंग 'CARE D' है, जो डिफ़ॉल्ट (कर्ज़ चुकाने में असमर्थता) या तत्काल डिफ़ॉल्ट के जोखिम का संकेत देती है।
इस क्लासिफिकेशन का सीधा मतलब है कि जब MTNL भविष्य में डेट सिक्योरिटीज (कर्ज़ प्रतिभूतियों) के ज़रिए फंड जुटाने की योजना बनाएगी, तो उसे 'लार्ज कॉर्पोरेट' कंपनियों के लिए अनिवार्य कड़े डिस्क्लोजर (खुलासे) और नियमों का पालन नहीं करना पड़ेगा।
SEBI का 'लार्ज कॉर्पोरेट' फ्रेमवर्क उन कंपनियों के लिए है जिनके पास महत्वपूर्ण लॉन्ग-टर्म बोरिंग्स (दीर्घकालिक उधार) होती हैं और उनकी क्रेडिट रेटिंग 'AA' या उससे ऊपर होती है। ऐसी कंपनियों को अपने नए डेट का कम से कम 25% हिस्सा बॉन्ड मार्केट के ज़रिए ही जारी करना होता है। इस मापदंड पर खरा न उतरने के कारण MTNL इन दायित्वों से बच निकली है, जिससे भविष्य में फंड जुटाने की इसकी स्ट्रक्चरिंग (संरचना) और आसानी पर असर पड़ सकता है।
दिल्ली और मुंबई में अपनी सेवाएं देने वाली सरकारी टेलीकॉम कंपनी MTNL लंबे समय से वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही है। BSNL की तरह, MTNL भी भारी नुकसान और कर्ज़ के बोझ तले दबी हुई है। इसके बैंक लोन 'CARE D' रेटेड हैं, जो कि सॉवरेन-गारंटीड बॉन्ड्स की 'CARE AAA (CE)' रेटिंग से बिल्कुल अलग है। कंपनी का भारी उधार और असुरक्षित बैंक सुविधाओं पर खराब रेटिंग ही मुख्य कारण हैं कि यह 'लार्ज कॉर्पोरेट' के पैमाने पर खरी नहीं उतरती, जिसके लिए 'AA' या उच्चतर क्रेडिट रेटिंग अनिवार्य है।
तो अब क्या बदलेगा? MTNL को 'लार्ज कॉर्पोरेट' के लिए निर्धारित 25% अनिवार्य डेट इश्यूएंस (उधार जारी करने) के नियम का पालन नहीं करना होगा। इसके अलावा, फंड जुटाने की गतिविधियों के लिए सख्त डिस्क्लोजर की ज़रूरतें भी इस पर लागू नहीं होंगी। कंपनी को भविष्य में डेट इश्यूएंस की स्ट्रक्चरिंग में अधिक लचीलापन मिलेगा।
हालांकि, MTNL के बैंक लोन पर 'CARE D' रेटिंग एक बड़ी चिंता का विषय है। यह रेटिंग बताती है कि कंपनी अपने बैंक उधारी पर डिफॉल्ट कर रही है या जल्द ही कर सकती है, जो कि सॉवरेन गारंटी द्वारा कवर नहीं हैं। बैंक ऑफ इंडिया के साथ MTNL का लोन अकाउंट सितंबर 2024 से नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया गया था, जो गंभीर लिक्विडिटी (नकदी) की समस्या को दर्शाता है।
MTNL, BSNL जैसी अन्य सरकारी टेलीकॉम कंपनियों के साथ एक मुश्किल माहौल में काम कर रही है। BSNL ने भी गंभीर वित्तीय संकट, भारी नुकसान और कर्मचारियों को सैलरी देने व परिचालन खर्चों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना किया है। ये दोनों कंपनियां भारत के पब्लिक सेक्टर टेलीकॉम सेक्टर के व्यापक वित्तीय दबाव को दर्शाती हैं, जो अक्सर ऊंचे ऑपरेशनल कॉस्ट (परिचालन लागत) और प्रतिस्पर्धी मार्केट चुनौतियों से प्रभावित होते हैं।
31 मार्च 2026 तक कुल बकाया उधार: ₹36,314 करोड़।
31 मार्च 2026 तक बकाया बॉन्ड उधार: ₹24,071 करोड़।
31 मार्च 2026 तक बकाया बैंक लोन उधार: ₹9,263 करोड़।
आगे क्या देखना होगा? MTNL की भविष्य की डेट इश्यूएंस योजनाएं और उनकी स्ट्रक्चरिंग। बैंक लोन के लिए 'CARE D' क्रेडिट रेटिंग में कोई बदलाव। MTNL के लिए व्यापक वित्तीय स्वास्थ्य सुधार या रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) की पहल।
