Indus Towers ने FY26 के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। पूरे फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 28.06% की बड़ी गिरावट के साथ ₹7,144.90 करोड़ पर आ गया।
यह गिरावट मुख्य रूप से कंपनी के एक प्रमुख ग्राहक (tenant) की तरफ से आ रहे वित्तीय दबाव के कारण है, जिसने रेवेन्यू रिकग्निशन (revenue recognition) और भुगतानों को प्रभावित किया।
हालांकि, कंपनी के लिए कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। इस दौरान कुल रेवेन्यू (Total Income) 8.21% बढ़कर ₹32,970.10 करोड़ दर्ज किया गया। सबसे अहम बात यह है कि कंपनी ने अपने कंसोलिडेटेड कर्ज (borrowings) में भारी कटौती की है। FY25 में ₹2,262.40 करोड़ का कर्ज अब घटकर सिर्फ ₹920.90 करोड़ रह गया है, जो 59% से अधिक की कमी है। इस कदम से कंपनी का बैलेंस शीट काफी मजबूत हुआ है।
इन नतीजों के बीच, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने शेयरधारकों को ₹14 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड (Dividend) का प्रस्ताव दिया है, जो मुश्किल हालात में भी शेयरधारकों को रिटर्न देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
Indus Towers, भारत के तेजी से बढ़ते टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का हिस्सा है, जो 5G रोलआउट और डेटा की बढ़ती मांग से प्रेरित है। कंपनी प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर्स को पैसिव इंफ्रास्ट्रक्चर (passive infrastructure) सेवाएं देती है। हाल के दिनों में Brookfield Asset Management द्वारा American Tower Corporation के भारतीय ऑपरेशंस के अधिग्रहण से मार्केट में कॉम्पिटिशन (competition) बढ़ गया है।
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसके कुछ बड़े ग्राहकों, विशेषकर Vodafone Idea (Vi), की वित्तीय अस्थिरता रही है। Vi के बकाया भुगतानों ने Indus Towers के प्रोविजन्स (provisions) को बढ़ाया है। इन चुनौतियों के बावजूद, कंपनी के लिए आगे का रास्ता 5G डिप्लॉयमेंट और नए टेनेंसी डील्स (tenancy deals) सुरक्षित करने पर निर्भर करेगा। निवेशकों की नजर अब ग्राहकों की भुगतान क्षमता और कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) को स्थिर करने के प्रयासों पर रहेगी।
