रेवेन्यू में रिकॉर्ड उछाल, पर प्रॉफिट पर लगा झटका
Bharti Airtel ने 31 मार्च 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस बार ₹2,10,972.80 करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया है। यह पिछले साल के मुकाबले 21.96% की जोरदार बढ़ोतरी है। लेकिन, इसी दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट 10% गिरकर ₹33,822.80 करोड़ पर आ गया, जो पिछले साल FY25 में ₹37,481.30 करोड़ था।
Q4 में भी दिखी मुनाफे पर दबाव की छाप
FY26 की चौथी तिमाही (Q4) में भी कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 15.68% बढ़कर ₹55,383.20 करोड़ रहा। मगर, Q4 का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट ₹12,475.80 करोड़ से घटकर ₹9,247.40 करोड़ हो गया। इस गिरावट की एक बड़ी वजह ₹3,160.70 करोड़ का एक खास रेगुलेटरी और सरकारी लेवी चार्ज रहा।
स्टैंडअलोन ऑपरेशंस हुए कमजोर
पूरे फाइनेंशियल ईयर की बात करें तो, सिर्फ भारत में चल रहे कंपनी के स्टैंडअलोन ऑपरेशंस में प्रॉफिट में लगभग 41.5% की भारी गिरावट देखी गई। इसके चलते, कंपनी की सालाना बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹58.00 से घटकर ₹45.96 पर आ गया।
नतीजों के मायने और कंपनी की रणनीति
रेवेन्यू में दमदार ग्रोथ यह बताती है कि कंपनी की सर्विसेज की मांग बढ़ी है, लेकिन प्रॉफिट में गिरावट इस बात की ओर इशारा करती है कि बढ़ते खर्चे और रेगुलेटरी बोझ ने टेलीकॉम सेक्टर पर दबाव बनाया है। तिमाही और सालाना दोनों प्रॉफिट फिगर पर इस एक बार के बड़े चार्ज का सीधा असर पड़ा है। स्टैंडअलोन प्रॉफिट में आई तेज गिरावट यह भी दर्शाती है कि कंसोलिडेटेड बिजनेस (जिसमें विदेशी कामकाज भी शामिल है) के मुकाबले घरेलू ऑपरेशंस पर मार्जिन का दबाव ज्यादा है।
कंपनी अपनी फाइनेंशियल पोजीशन को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। FY26 में, भारती एयरटेल ने ₹15,696.00 करोड़ का राइट्स इश्यू पूरा किया, जिसका इस्तेमाल कैपिटल एक्सपेंडिचर और कर्ज चुकाने में किया गया। इसी वजह से, कंसोलिडेटेड बोरिंग्स (कर्ज) FY25 के ₹1,483,123 मिलियन से घटकर FY26 में ₹1,216,714 मिलियन रह गई। कंपनी भारत में अपना 5G नेटवर्क का विस्तार भी तेजी से कर रही है।
निवेशकों की नजरें कहाँ?
शेयरधारकों को ₹24 प्रति शेयर के सुझाए गए डिविडेंड का फायदा मिलेगा, जो कंपनी की कैश फ्लो जनरेशन को दिखाता है। कंसोलिडेटेड बोरिंग्स में कमी कंपनी की बैलेंस शीट को और मजबूत करती है। निवेशकों की मुख्य नजर कंपनी के मुख्य बिजनेस सेगमेंट्स के परफॉरमेंस और कॉस्ट मैनेजमेंट पर रहेगी। भविष्य में रेगुलेटरी लायबिलिटी और स्टैंडअलोन ऑपरेशंस के लिए प्रॉफिट मार्जिन की स्थिरता पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी।
आगे क्या हो सकता है?
₹3,160.7 करोड़ का रेगुलेटरी और सरकारी लेवी चार्ज एक बड़ा चिंता का विषय है। भले ही इसे "एक बार का" इवेंट कहा जा रहा है, यह भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री में लागत बढ़ने की संभावनाओं को दर्शाता है। स्टैंडअलोन प्रॉफिट मार्जिन पर लगातार दबाव भी एक बड़ा फैक्टर है, जो बताता है कि घरेलू बाजार की रणनीतियों में मुनाफे को बनाए रखने के लिए बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।
इंडस्ट्री का परिदृश्य
Bharti Airtel की रेवेन्यू ग्रोथ कई प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर रही है। हालांकि, प्रॉफिट में गिरावट कुछ ऐसी कंपनियों के विपरीत है जिन्होंने लागत को बेहतर तरीके से मैनेज किया या जिन्हें रेगुलेटरी असर कम झेलना पड़ा। Reliance Jio सब्सक्राइबर ग्रोथ और 5G डिप्लॉयमेंट में मार्केट लीडर बनी हुई है। Vodafone Idea फंड जुटाने और नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
मुख्य मेट्रिक्स पर एक नजर
- FY26 कंसोलिडेटेड रेवेन्यू: ₹210,972.80 करोड़ (21.96% YoY बढ़ा)
- FY26 कंसोलिडेटेड प्रॉफिट: ₹33,822.80 करोड़ (10.00% YoY घटा)
- FY26 स्टैंडअलोन प्रॉफिट: लगभग 41.5% YoY घटा
- FY26 कंसोलिडेटेड बोरिंग्स: ₹1,216,714 मिलियन (FY25 से कम)
- सुझाया गया डिविडेंड: ₹24 प्रति शेयर
आगे क्या देखना होगा
निवेशक रेगुलेटरी चार्ज की प्रकृति और भविष्य के असर के बारे में मैनेजमेंट की कमेंट्री का इंतजार करेंगे। आने वाली तिमाहियों में स्टैंडअलोन भारतीय ऑपरेशंस के परफॉरमेंस पर अपडेट अहम होंगे। 5G नेटवर्क विस्तार, सब्सक्राइबर बढ़ाना और कर्ज प्रबंधन की रणनीतियों पर नजर रखी जाएगी।
