Wipro Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने एक अहम फैसला लेते हुए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर सुश्री Tulsi Naidu की री-अपॉइंटमेंट को हरी झंडी दे दी है। उनका दूसरा कार्यकाल 1 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 30 जून, 2031 तक चलेगा। यह पांच साल का एक्सटेंशन कंपनी के शेयरहोल्डर्स के वोट ऑफ अप्रूवल पर निर्भर करेगा। सुश्री Naidu का मौजूदा कार्यकाल 30 जून, 2026 को समाप्त हो रहा है।
क्यों है यह नियुक्ति अहम?
इस नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य Wipro जैसे बड़े आईटी फर्म के लीडरशिप लेवल पर स्थिरता और निरंतरता बनाए रखना है। ग्लोबल फाइनेंसियल सर्विसेज सेक्टर में उनके गहरे अनुभव से कंपनी को स्ट्रेटेजिक गाइडेंस मिलने की उम्मीद है, खासकर रिस्क मैनेजमेंट और फाइनेंसियल ओवरसाइट जैसे क्षेत्रों में। उनके इस पद पर बने रहने से अनुभवी लीडरशिप और एक सुसंगत गवर्नेंस स्ट्रक्चर सुनिश्चित होगा।
सुश्री Naidu का बैकग्राउंड
सुश्री Tulsi Naidu पहली बार 1 जुलाई, 2021 को Wipro के बोर्ड से एक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में जुड़ी थीं। शेयरहोल्डर्स ने उनकी शुरुआती पांच साल की नियुक्ति को कंपनी की 75वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में मंजूरी दी थी। उनके पास ग्लोबल फाइनेंसियल सर्विसेज सेक्टर में दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने Zurich Insurance Group में CEO Asia Pacific और Prudential में महत्वपूर्ण लीडरशिप रोल निभाए हैं। सुश्री Naidu फिलहाल ऑडिट, रिस्क एंड कम्प्लायंस कमेटी और नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी जैसी अहम बोर्ड कमेटियों में सक्रिय हैं। उनकी विशेषज्ञता बैंकिंग, इंश्योरेंस, साइबर सिक्योरिटी और रिस्क मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में फैली हुई है।
अन्य डायरेक्टर्स का रिटायरमेंट
इसी के साथ, Wipro ने यह भी बताया है कि दो अन्य इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स, डॉ. Patrick J. Ennis और मिस्टर Patrick Dupuis, 31 मार्च, 2026 को अपने टेन्योर पूरे होने पर रिटायर हो जाएंगे।
शेयरहोल्डर्स का अप्रूवल ज़रूरी
सुश्री Naidu की री-अपॉइंटमेंट के लिए सबसे अहम अगला कदम Wipro शेयरहोल्डर्स से औपचारिक मंजूरी हासिल करना है। निवेशक इस पर बारीकी से नज़र रखेंगे।
इंडस्ट्री ट्रेंड्स के अनुरूप
Wipro का यह कदम भारतीय आईटी सर्विसेज सेक्टर में इंडस्ट्री प्रैक्टिसेज के अनुरूप है, जहां इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स बोर्ड कंपोजीशन का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 56%) होते हैं। यह SEBI रेगुलेशंस के अनुसार भी है, जिसके तहत अगर चेयरपर्सन एग्जीक्यूटिव रोल में है तो कम से कम 50% डायरेक्टर्स इंडिपेंडेंट होने चाहिए। TCS और Infosys जैसी कंपनियां भी अनुभवी इंडिपेंडेंट ओवरसाइट पर जोर देती हैं, जो इस सेक्टर में मजबूत गवर्नेंस स्ट्रक्चर्स के महत्व को रेखांकित करता है।
अगले कदम
आगे चलकर, निवेशक सुश्री Naidu की री-अपॉइंटमेंट पर होने वाली शेयरहोल्डर मीटिंग की तारीख और उसके नतीजों पर नज़र रखेंगे।
