Wherrelz IT Solutions लिमिटेड ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी के अनुसार, कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की एक अहम बैठक 17 अप्रैल, 2026 को होने वाली है।
इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा फाइनेंशियल ईयर 2026 (जो 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुआ) के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स को अंतिम मंजूरी देना है। इसके साथ ही, बोर्ड नॉन-प्रमोटर इन्वेस्टर्स को कैश के बदले नए शेयर या वॉरंट जारी करने (Preferential Issue) पर भी विचार करेगा। मीटिंग में इस प्रस्तावित इश्यू और शेयरधारकों की एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) की तारीखें भी तय की जाएंगी।
इस बोर्ड मीटिंग का मकसद कंपनी के पिछले फाइनेंशियल ईयर के प्रदर्शन को फाइनल करना है। प्रस्तावित प्रेफरेंशियल इश्यू कंपनी के लिए कैपिटल जुटाने की कोशिश को दर्शाता है, जो शायद ग्रोथ प्लान्स या अन्य वित्तीय जरूरतों के लिए हो। हालांकि, इस तरह से फंड जुटाने, जिसमें सिलेक्टेड इन्वेस्टर्स को तय कीमत पर शेयर अलॉट किए जाते हैं, मौजूदा शेयरधारकों के हिस्सेदारी (Ownership Stake) को पतला करने का जोखिम रहता है। यह डाइल्यूशन तब और बड़ा हो सकता है जब जुटाई गई पूंजी का सही इस्तेमाल न हो या इश्यू प्राइस मौजूदा मार्केट वैल्यू से काफी कम रखा जाए।
Wherrelz IT Solutions, जो ERP और IoT सॉल्यूशंस जैसी IT सर्विसेज देती है, ने दिसंबर 2021 में अपना IPO (Initial Public Offering) लॉन्च किया था, जिसके जरिए ₹2.01 करोड़ जुटाए गए थे। इसके बावजूद, कंपनी का पिछला प्रदर्शन चिंताजनक रहा है। पिछले पांच सालों में कंपनी की कमाई औसतन -70.6% सालाना गिरी है, और घाटा लगातार बढ़ा है। यह स्थिति IT इंडस्ट्री के मुकाबले बिल्कुल विपरीत है, जहां आम तौर पर ग्रोथ देखी गई है। कंपनी के शेयर में भी पिछले एक साल में -26.99% की गिरावट आई है और यह बार-बार नए 52-हफ्ते के निचले स्तर (52-week low) को छू रहा है। वहीं, Tata Consultancy Services, Infosys, Wipro और HCL Technologies जैसे बड़े भारतीय IT प्लेयर्स लगातार मजबूत रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ दिखा रहे हैं, जिसका फायदा उन्हें मजबूत मार्केट डिमांड से मिल रहा है। Wherrelz IT की स्थिति इन कंपनियों से साफ तौर पर अलग है।
प्रस्तावित प्रेफरेंशियल इश्यू को पूरा करने के लिए शेयरधारकों से EGM में और संबंधित रेगुलेटरी बॉडीज से जरूरी अप्रूवल (Approvals) लेना होगा। इन अप्रूवल के न मिलने पर फंड जुटाने की योजना अटक सकती है। कंपनी की लगातार गिरती कमाई और घाटे को देखते हुए, यह देखना अहम होगा कि जुटाई गई नई पूंजी का इस्तेमाल कंपनी के विकास और वित्तीय सेहत को सुधारने में कैसे किया जाएगा।