अधिग्रहणों पर दमदार खर्च, लॉजिस्टिक्स में विस्तार
कंपनी ने इस अवधि में ₹35.44 करोड़ का निवेश करके LP Logistics Plus LLC में 100% इक्विटी स्टेक हासिल किया है, जिससे यह अब Trejhara Solutions की पूरी तरह से नियंत्रित सहायक कंपनी बन गई है. यह एक मैटेरियल रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन (Material Related Party Transaction) था.
इसके अलावा, ₹15 करोड़ का उपयोग GS Marketing Associates के बिजनेस अंडरटेकिंग के अधिग्रहण के लिए किया गया. इस सौदे का कुल संशोधित कंसीडरेशन (Revised Consideration) ₹95.00 करोड़ था, जिसका एक हिस्सा OCRPS के माध्यम से फाइनेंस किया गया. इन खर्चों के बाद, कंपनी के संशोधित प्रेफरेंशियल इश्यू का आकार अब ₹162.17 करोड़ हो गया है.
₹111.73 करोड़ के वारंट्स: एक बड़ा सवाल?
Q4 FY26 में फंड के उपयोग के बाद, ₹111.73 करोड़ की रकम अभी भी अप्रयुक्त (Unutilized) है, जो वारंट होल्डर्स (Warrant Holders) से मिलने वाली है. यह राशि कंपनी की आगे की रणनीतिक पहलों को पूरा करने के लिए जरूरी है. यह फंड्स का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिस पर कंपनी की विस्तार योजनाओं की सफलता निर्भर करती है.
पहिले Cigniti Technologies के नाम से जानी जाने वाली Trejhara Solutions, अपनी मुख्य आईटी और डिजिटल इंजीनियरिंग सेवाओं से आगे बढ़कर लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में विस्तार कर रही है. कंपनी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वारंट होल्डर्स समय पर ₹111.73 करोड़ का भुगतान करें. यदि शेयर की कीमत वारंट कन्वर्जन प्राइस ₹162.00 से नीचे गिरती है, तो वारंट धारक उन्हें कन्वर्ट न करने का फैसला कर सकते हैं, जिससे यह राशि कंपनी को नहीं मिल पाएगी. 20 अप्रैल 2026 तक, शेयर की मार्केट प्राइस ₹166.00 थी, जो कन्वर्जन प्राइस से थोड़ी ऊपर है.
निवेशकों की नजरें अब वारंट धारकों से बकाया ₹111.73 करोड़ के समय पर मिलने और 18-महीने के अलॉटमेंट पीरियड के भीतर वारंट्स के कन्वर्जन स्टेटस पर टिकी रहेंगी. साथ ही, GS Marketing Associates और LP Logistics Plus LLC के अधिग्रहणों का इंटीग्रेशन सक्सेस भी कंपनी के भविष्य के वैल्यूएशन के लिए महत्वपूर्ण होगा. कंपनी की शेयर प्राइस का ₹162.00 के वारंट कन्वर्जन प्राइस के मुकाबले प्रदर्शन एक क्रिटिकल फैक्टर बना रहेगा.
