Tech Mahindra ने FY26 के शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले साल के मुकाबले 13% बढ़कर ₹4,805.50 करोड़ पर पहुंच गया है, जबकि कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 5.58% बढ़कर ₹56,847.30 करोड़ दर्ज किया गया। चौथी तिमाही (Q4 FY26) में भी कंपनी ने ₹1,356.40 करोड़ का PAT और ₹14,871.40 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछली साल की समान तिमाही से 9.70% ज़्यादा है।
इस फाइनेंशियल ईयर की सबसे बड़ी उपलब्धि कंपनी का कर्ज़ घटाना रही। Tech Mahindra ने अपने कंसॉलिडेटेड बोरिंग्स को 85.24% तक कम करके ₹69.60 करोड़ कर दिया है, जो पिछले साल ₹471.40 करोड़ था। कर्ज़ में आई इस भारी कमी और मुनाफे के दम पर कंपनी ने अब तक का सबसे बड़ा ₹51 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है।
लेकिन, इन शानदार नंबरों के बीच कुछ गंभीर चिंताएं भी हैं। कंपनी पर ₹2,500 करोड़ से भी ज़्यादा के लीगल और रेगुलेटरी देनदारियां (contingencies) हैं। इनमें सबसे बड़ी चिंता सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज (Satyam Computer Services) के अधिग्रहण से जुड़े ₹1,230.40 करोड़ के क्लेम हैं, जिन्हें ऑडिटर ने 'Emphasis of Matter' बताया है। इसके अलावा, प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (Provident Fund Commissioner) की ओर से ₹1,287.40 करोड़ की डिमांड भी कोर्ट में विचाराधीन है।
हाल ही में लागू हुए नए लेबर कोड्स के कारण कंपनी को ₹272.40 करोड़ का एक बार का खर्च (exceptional charge) उठाना पड़ा है। साथ ही, कंपनी ने स्टैंडअलोन निवेशों पर ₹575.00 करोड़ का इम्पेयरमेंट (impairment) भी दर्ज किया है, जो कुछ संपत्तियों की समीक्षा का संकेत देता है।
सेक्टर की बात करें तो, Tech Mahindra का 13% का PAT ग्रोथ IT सेक्टर के अन्य प्रमुख कंपनियों जैसे Infosys और Wipro के मुकाबले अच्छा है। हालांकि, इसका सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर इसकी भारी-भरकम लीगल देनदारियां हैं, जो इसके प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में ज़्यादा हैं।
आगे चलकर, निवेशकों की नज़र सत्यम क्लेम और प्रोविडेंट फंड विवाद के समाधान पर रहेगी। साथ ही, कंपनी कैसे अपने रेवेन्यू ग्रोथ को बनाए रखती है और अपने शेयरहोल्डर्स को रिटर्न देती है, यह भी अहम होगा।
