घाटे की वजह क्या है?
कंपनी ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही के लिए अपने ऑडिट किए गए नतीजे जारी किए हैं। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 9.4% बढ़कर ₹6,554 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹5,992 करोड़ से ज्यादा है। हालांकि, कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 74.7% की भारी गिरावट के साथ ₹263.25 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹1,040.34 करोड़ था।
कंपनी मैनेजमेंट का कहना है कि मुनाफे में यह तेज गिरावट इसलिए आई है क्योंकि पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी को सब्सिडियरी की बिक्री से बड़ा एकमुश्त फायदा (one-time gains) हुआ था, जो इस बार नहीं है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
कंपनी के बोर्ड ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए प्रति शेयर ₹17.50 का फाइनल डिविडेंड (Dividend) देने की सिफारिश की है।
Meski रेवेन्यू ग्रोथ, खासकर डिजिटल सर्विसेज से, कंपनी की अच्छी परफॉरमेंस को दिखाता है, लेकिन प्रॉफिट में यह गिरावट और कंपनी पर चल रही बड़ी कंटीजेंट लायबिलिटी (contingent liabilities) निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
भविष्य की योजनाएं और रिस्क
Tata Communications अपनी डिजिटल क्षमताओं को लगातार बढ़ा रही है। हाल ही में, कंपनी ने दिसंबर 2025 में Commotion, Inc. को $25.5 मिलियन में खरीदा और NVIDIA GPUs के साथ AI Cloud Infrastructure जैसी नई सेवाएं लॉन्च की हैं। इन पहलों का मकसद डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सर्विसेज में ग्रोथ को बढ़ावा देना है।
हालांकि, कंपनी के सामने ₹7,513.71 करोड़ की एक बड़ी कंटीजेंट लायबिलिटी का जोखिम भी है। यह डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन्स (Department of Telecommunications) से लाइसेंस फीस की मांग को लेकर है। अगर इसका समाधान कंपनी के पक्ष में नहीं होता है, तो यह एक बड़ी वित्तीय चुनौती बन सकता है।
पूरे साल का प्रदर्शन
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 में, Tata Communications का रेवेन्यू ₹24,803 करोड़ रहा, जो पिछले साल से 7.3% ज्यादा है। FY26 के लिए प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Profit After Tax) ₹1,044 करोड़ रहा, जो FY25 के ₹1,625 करोड़ से कम है। वहीं, Q4 FY26 के लिए EBITDA 14.4% बढ़कर ₹1,284 करोड़ रहा, जिससे मार्जिन 19.6% तक पहुँच गया।
