क्यों बंद हुई ट्रेडिंग विंडो?
TAKE Solutions ने यह कदम SEBI (Insider Trading) रेगुलेशंस और कंपनी के अपने कोड ऑफ कंडक्ट के तहत उठाया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जब तक कंपनी के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स पब्लिक डोमेन में नहीं आ जाते, तब तक कंपनी के प्रमोटर्स, डायरेक्टर्स, की मैनेजमेंट पर्सोनल और अन्य डेजिग्नेटेड लोगों द्वारा किसी भी तरह की अंदरूनी (insider) ट्रेडिंग को रोका जा सके।
ट्रेडिंग विंडो का महत्व
ट्रेडिंग विंडो वो समय सीमा होती है जब कंपनी के अंदरूनी लोग (insiders) अपने शेयर खरीद या बेच सकते हैं। जब प्राइस-सेंसिटिव जानकारी, जैसे कि फाइनेंशियल रिजल्ट्स, पब्लिक होने वाली होती है, तब इन विंडो को बंद कर दिया जाता है। यह इसलिए किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी निवेशकों को एक समान मौका मिले और कोई भी अंदरूनी जानकारी का गलत फायदा न उठा सके।
क्या है नियम?
SEBI (Insider Trading) रेगुलेशंस, 2015 के तहत, कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होता है कि डेजिग्नेटेड पर्सन्स और उनके करीबी रिश्तेदार, जब तक उनके पास कोई अनपब्लिश्ड प्राइस-सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन (UPSI) हो, तब तक वे कंपनी के शेयर ट्रेड न करें। हालिया नियमों के अनुसार, यह रोक अब डेजिग्नेटेड पर्सन्स के इमीडिएट रिलेटिव्स पर भी लागू होती है।
आगे क्या?
TAKE Solutions के प्रमोटर्स, डायरेक्टर्स, की मैनेजमेंट पर्सोनल, डेजिग्नेटेड पर्सन्स और उनके इमीडिएट रिलेटिव्स 1 अप्रैल, 2026 से लेकर कंपनी के FY2026 के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिजल्ट्स की घोषणा के 48 घंटे बाद तक कंपनी के शेयरों का ट्रेड नहीं कर पाएंगे। कंपनी नतीजों को मंजूर करने के लिए बोर्ड मीटिंग की तारीख अलग से बताएगी।
