कंपनी के डायरेक्टर्स बोर्ड की 20 अप्रैल, 2026 को हुई बैठक में इन अहम नियुक्तियों को मंजूरी दी गई। Ritu Tiwari अब इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर और Anshu Gupta कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर के तौर पर अपना काम संभालेंगी।
ये नियुक्तियां Svam Software द्वारा कॉर्पोरेट गवर्नेंस और रेगुलेटरी कंप्लायंस पर बढ़ते फोकस को दर्शाती हैं। एक अनुभवी इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और एक समर्पित कंप्लायंस ऑफिसर से कंपनी की निगरानी (oversight) में सुधार और कानूनी नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह कदम तब उठाया गया है जब कंपनी का अतीत में रेगुलेटरी चुनौतियों से सामना रहा है। इससे पहले, 14 अप्रैल, 2026 को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर Rajesh Kumar Vaid ने निजी कारणों से इस्तीफा दे दिया था। Svam Software का रेगुलेटरी रिकॉर्ड पहले भी सवालों के घेरे में रहा है, जिसमें SEBI की ओर से वित्तीय अनियमितताओं की जांच, संदिग्ध शेल कंपनी के तौर पर पहचान, जिसके चलते ट्रेडिंग पर प्रतिबंध भी लगे। कंपनी पर लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स और डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना भी लगाया गया था। पिछले ऑडिट में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर ड्यू डिलिजेंस (due diligence) में कमी पाई गई थी, और डायरेक्टर्स में लगातार बदलाव बोर्ड की अस्थिरता का संकेत देता है।
Ms. Tiwari की नियुक्ति का मकसद बोर्ड की स्वतंत्रता को बढ़ाना और गवर्नेंस मामलों पर रणनीतिक सलाह देना है। वहीं, Ms. Gupta का मुख्य काम इंटरनल कंट्रोल्स को मजबूत करना और SEBI नियमों व अन्य कानूनों के अनुपालन को सुनिश्चित करना होगा। ये पद पब्लिक कंपनी के ऑपरेशन्स को मैनेज करने और पिछली गवर्नेंस समस्याओं से निपटने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
SEBI के जुर्माने और डायरेक्टर ड्यू डिलिजेंस पर ऑडिट की फाइंडिंग्स जैसी पिछली रेगुलेटरी दिक्कतें अभी भी जोखिम बनी हुई हैं। नई नियुक्तियों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितने प्रभावी ढंग से मजबूत गवर्नेंस लागू कर पाती हैं और पिछली कंप्लायंस की कमियों को दूर कर पाती हैं। कंपनी की ओर से अनअप्रूव्ड लोन और कैश ट्रांजैक्शन्स का इतिहास भी कड़ी निगरानी की मांग करता है।
निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि Ms. Tiwari की निगरानी बोर्ड के फैसलों को कैसे प्रभावित करती है, और Ms. Gupta कंप्लायंस फ्रेमवर्क व रिपोर्टिंग को बेहतर बनाने में कितनी प्रभावी साबित होती हैं। मुख्य क्षेत्रों में SEBI नियमों का भविष्य में अनुपालन, बोर्ड की स्थिरता में सुधार के संकेत, और नई नियुक्तियों द्वारा पिछली गवर्नेंस और कंप्लायंस की समस्याओं का समाधान शामिल है।
