OFS में बंपर सब्सक्रिप्शन, MPS नॉर्म्स होंगे पूरे?
String Metaverse Ltd ने अपने Offer for Sale (OFS) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। 22 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुए इस OFS में रिटेल निवेशकों (Retail Investors) की ओर से 495% का जबरदस्त सब्सक्रिप्शन मिला। वहीं, नॉन-रिटेल निवेशकों (Non-Retail Investors) ने भी 149% का सब्सक्रिप्शन दिया। कंपनी को उम्मीद है कि इस मजबूत भागीदारी से वह मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) की ज़रूरतों को पूरा कर पाएगी, जो शेयर बाज़ार में लिस्टेड रहने के लिए ज़रूरी है।
'बोनस शेयर' की सौगात का इंतज़ार
अब कंपनी के निवेशक 'बोनस शेयर' (Bonus Shares) की सौगात की उम्मीद कर सकते हैं। String Metaverse के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स 29 अप्रैल, 2026 को एक मीटिंग में बोनस इक्विटी शेयर जारी करने के प्रस्ताव पर विचार करेंगे। यह कदम शेयरधारकों को पुरस्कृत करने और बाज़ार में लिक्विडिटी (Liquidity) बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
कंपनी का बदलाव और कंप्लायंस पर फोकस
बता दें कि String Metaverse, जो पहले Bio Green Papers Ltd के नाम से जानी जाती थी, अब पेपर मैन्युफैक्चरिंग से हटकर Web 3.0, गेमिंग और फिनटेक (Fintech) सॉल्यूशंस पर फोकस कर रही है। कंपनी MPS कंप्लायंस (Compliance) के लिए लगातार काम कर रही थी, जिसके लिए 22 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुए OFS से पहले जनवरी 2026 में भी OFS की योजना का खुलासा किया गया था। प्रमोटर्स, जिसमें Spacenet Enterprises India Ltd. भी शामिल है, ने पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने के लिए अपनी हिस्सेदारी बेची है।
हालिया स्टॉक स्प्लिट और पिछला रेगुलेटरी मुद्दा
हाल ही में, कंपनी ने एक स्टॉक स्प्लिट (Stock Split) भी पूरा किया है, जिसमें शेयर की फेस वैल्यू (Face Value) ₹10 से घटाकर ₹1 कर दी गई है, जो 24 अप्रैल, 2026 से प्रभावी है। हालांकि, कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड पूरी तरह से स्मूथ नहीं रहा है। मार्च 2026 में, SEBI ने इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading) के उल्लंघन का पता लगाया था, जिसके चलते कंपनी पर जुर्माना लगाया गया था।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को सलाह है कि वे 29 अप्रैल, 2026 की बोर्ड मीटिंग के नतीजों पर नज़र रखें। बोनस शेयर जारी करने के किसी भी प्रस्ताव के लिए वैधानिक और नियामक मंजूरी (Statutory and Regulatory Approvals) की ज़रूरत होगी, जिसमें देरी हो सकती है या यह लागू भी न हो पाए। इसके अलावा, OFS के बावजूद, पब्लिक शेयरहोल्डिंग अभी भी अनिवार्य 25% के स्तर से कम रह सकती है, जिसके लिए आगे भी कंपनी को प्रयास करने पड़ सकते हैं। SEBI द्वारा लगाया गया पिछला जुर्माना कंपनी के गवर्नेंस (Governance) पर निरंतर निगरानी का एक रिमाइंडर है।
