कंपनी का 'टैलेंट रिटेंशन' प्लान
यह कदम कंपनी के सबसे काबिल और महत्वपूर्ण कर्मचारियों को कंपनी के साथ जोड़े रखने और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इन स्टॉक ऑप्शन्स की एक खास वेस्टिंग शेड्यूल (Vesting Schedule) तय की गई है, जिसके तहत कर्मचारी इन शेयरों के हकदार बनेंगे।
कैसे काम करेगा यह प्लान?
26 मार्च 2026 को दी गई मंजूरी के अनुसार, प्रत्येक शेयर ₹750 पर ऑफर किया जाएगा। इन शेयरों के वेस्टिंग की समय-सीमा चार साल की होगी:
- पहले साल में 10% शेयर मिलेंगे।
- दूसरे साल में 20% शेयर मिलेंगे।
- तीसरे साल में 30% शेयर मिलेंगे।
- और चौथे साल में बाकी 40% शेयर मिलेंगे।
वेस्टिंग पूरी होने के बाद, कर्मचारियों के पास इन ऑप्शन्स को एक्सरसाइज करने के लिए तीन साल का समय होगा।
शेयरधारकों के लिए क्या हैं मायने?
RateGain का यह कदम दिखाता है कि कंपनी अपने कर्मचारियों को कंपनी की तरक्की का अहम हिस्सा मानती है। इक्विटी इंसेंटिव्स देकर, कंपनी का लक्ष्य कर्मचारियों को मोटिवेट करना और प्रतिस्पर्धी ट्रैवल टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में लंबी अवधि तक उन्हें बनाए रखना है। इस प्लान से कर्मचारियों के हित कंपनी के विकास और शेयरधारकों के लिए वैल्यू क्रिएशन के साथ जुड़ जाएंगे।
हालांकि, कंपनी की तरफ से इस ग्रांट से जुड़े किसी खास जोखिम का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन सामान्य तौर पर ESOPs से शेयरधारकों के लिए डायल्यूशन (Dilution) का जोखिम बढ़ सकता है, क्योंकि नई इक्विटी शेयर्स जारी किए जाते हैं। मैनेजमेंट इसे कर्मचारी रिटेंशन के जरिए कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन को बढ़ावा देने में एक रणनीतिक निवेश के तौर पर देख रहा है।