कर्मचारियों को 'अपना' बनाने का दांव
Physicswallah का यह कदम edtech सेक्टर में टैलेंट (talent) को बनाए रखने के लिए एक आम और असरदार तरीका है। इन स्टॉक ऑप्शन्स के जरिए, कंपनी अपने कर्मचारियों को कंपनी की ग्रोथ का सीधा फायदा उठाने का मौका दे रही है, जिससे उनमें मालिकाना हक की भावना (sense of ownership) बढ़ेगी और वे कंपनी से लंबे समय तक जुड़े रहेंगे।
हालांकि, मौजूदा शेयरहोल्डर्स (shareholders) के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि जब कर्मचारी अपने ऑप्शन्स को एक्सरसाइज करेंगे, तो नए शेयर्स जारी होने से कंपनी की कुल शेयर होल्डिंग (share holding) का डाइल्यूशन (dilution) हो सकता है, जिससे प्रति शेयर वैल्यू पर थोड़ा असर पड़ सकता है।
Physicswallah, जिसे 2016 में Alakh Pandey और Prateek Maheshwari ने शुरू किया था, भारतीय edtech स्पेस में एक बड़ा नाम बन चुकी है। कंपनी 2022 में यूनिकॉर्न (unicorn) बनी और नवंबर 2025 में अपना IPO (Initial Public Offering) लाकर करीब ₹3,480 करोड़ जुटाए थे। एड-टेक जैसी हाई-कॉम्पिटिशन इंडस्ट्री में टैलेंट को आकर्षित करने और बनाए रखने के लिए ESOPs एक अहम टूल हैं। Unacademy और Vedantu जैसी कंपनियां भी इस तरह के इंसेंटिव का इस्तेमाल करती रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 अगस्त, 2025 तक Physicswallah में करीब 13,858 कर्मचारी थे और कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 25 में ₹2,887 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था। कंपनी के सामने कुछ अन्य चुनौतियां भी हैं, जैसे कि 'साइलेंट टर्मिनेशन' (silent terminations) को लेकर लगे आरोप और छात्र सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं, लेकिन टैलेंट रिटेंशन पर यह ESOPs का फैसला एक अहम स्ट्रेटेजी का हिस्सा है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि ये नए स्टॉक ऑप्शन्स कैसे वेस्ट (vest) होते हैं, कर्मचारी कितनी तेजी से इन्हें एक्सरसाइज करते हैं, और इससे कंपनी की कुल शेयर होल्डिंग पर कितना असर पड़ता है। साथ ही, कर्मचारियों की भावना और रिटेंशन रेट्स पर भी इसका क्या प्रभाव पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।