Persistent Systems की 'French Unit' बिकी, Aepona Group ने की डील
Persistent Systems Limited ने अपनी पूरी फ्रेंच सब्सिडियरी Persistent Systems France S.A.S. को आयरलैंड की Aepona Group Limited को बेचने का एग्रीमेंट साइन किया है। यह डील कंपनी की ग्लोबल ऑपरेशन्स को स्ट्रीमलाइन (streamline) करने और एफिशिएंसी (efficiency) बढ़ाने की बड़ी स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है।
क्यों किया ये फैसला?
घटती आमदनी वाली सब्सिडियरी को बेचकर, Persistent Systems कॉर्पोरेट कॉम्प्लेक्सिटी (complexity) को कम करना चाहती है और अपने मुख्य बिजनेस एरिया पर रिसोर्सेज (resources) फोकस करना चाहती है। यह मूव कंपनी के इंटरनेशनल स्ट्रक्चर को और भी सिंपल बनाने में मदद करेगा।
स्ट्रक्चरल बदलाव और कमाई का गणित
इस ट्रांजैक्शन (transaction) के बाद, Persistent Systems France S.A.S. सीधे Persistent Systems की यूनिट न रहकर, Aepona Group Limited के तहत एक स्टेप-डाउन सब्सिडियरी बन जाएगी। इसका मकसद कंपनी के यूरोपियन ऑपरेशन्स की ओनरशिप स्ट्रक्चर (ownership structure) को सिंपल बनाना है। इस खास सेल के लिए किसी एडिशनल रेगुलेटरी अप्रूवल (regulatory approval) की उम्मीद नहीं है।
फ्रांसीसी यूनिट की गिरती कमाई
फ्रांसीसी सब्सिडियरी का टर्नओवर (turnover) लगातार गिरता रहा है। FY23 में जहाँ यह EUR 12.73 मिलियन था, वहीं FY24 में यह घटकर EUR 8.15 मिलियन हो गया और FY25 में गिरकर EUR 6.18 मिलियन तक पहुंच गया। इस सब्सिडियरी को बेचने का डील प्राइस EUR 1,132,991 है, जो कि इसके पेड-अप कैपिटल (paid-up capital) EUR 1,500,000 से कम है।
इंडस्ट्री ट्रेंड और भविष्य का रास्ता
IT सर्विसेज सेक्टर में, जिसमें Infosys, TCS, Wipro और HCLTech जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां शामिल हैं, अक्सर पोर्टफोलियो एडजस्टमेंट (portfolio adjustment) होते रहते हैं। Tech Mahindra जैसी कंपनियों ने भी परफॉरमेंस में कमजोर यूनिट्स को डिवेस्ट (divest) किया है। Persistent का यह कदम एफिशिएंसी और फोकस बढ़ाने की इंडस्ट्री ट्रेंड के अनुरूप है। यह कंपनी के व्यापक रीस्ट्रक्चरिंग (restructuring) का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों को 31 मार्च, 2026 की डेडलाइन तक शेयर ट्रांसफर की ऑफिशियल कन्फर्मेशन (confirmation) का इंतजार करना चाहिए। साथ ही, मैनेजमेंट से इस रीस्ट्रक्चरिंग से मिले स्ट्रैटेजिक बेनिफिट्स (strategic benefits) और ओवरऑल ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर कंपनी के कमेंट्स पर नजर रखनी होगी।
